कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को एक्स पर अपना एक वीडियो पोस्ट कर पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल पर टैरिफ को लेकर भ्रम फैलाने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रही है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर मोदी सरकार पर एक बार फिर से निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से टेक्सटाइल उद्योग तबाह हो जाएगा, ऐसे में यह सौदा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को एक्स पर अपना एक वीडियो पोस्ट कर पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल पर टैरिफ को लेकर भ्रम फैलाने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रही है।
राहुल गांधी ने कहा, “हिन्दुस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर 5 करोड़ परिवार को रोजगार देता है। भारत-अमेरिका के इस डील से यह सेक्टर खत्म हो जाएगा। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं और पूरा हिन्दुस्तान जानता है।”
उन्होंने कहा, “18 प्रतिशत टैरिफ बनाम 0 प्रतिशत – आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं। और, किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।”
कांग्रेस सांसद ने मोदी सरकार से पूछा, “भारत के गारमेंट्स पर 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया – “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी।” आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई? और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है – या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल?”
उन्होंने आगे कहा, “अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा। और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।”
राहुल ने कहा, “भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।”
उन्होंने कहा, “एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स – दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती। लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।”

