लॉकडाउन की अफवाहें प्रधानमंत्री मोदी के चार दिन पहले संसद में दिए गए बयान के बाद शुरू हुई। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर करीब-करीब पूरी दुनिया पर देखा जा रहा है। ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में तेल के जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा रखी है, जिसकी वजह से दुनियाभर में तेल और गैस की किल्लत बढ़ती जा रही है। भारत पर इसका व्यापक असर दिख रहा है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं और एलपीजी यानी रसोई गैस की कमी की भी खबरें आ रही हैं। वहीं पीएम के संसद में दिए गए बयान से लोगों में बेचैनी और बढ़ गई है।
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
दरअसल, लॉकडाउन की अफवाहें प्रधानमंत्री मोदी के चार दिन पहले संसद में दिए गए बयान के बाद शुरू हुई। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं।
अब केंद्र सरकार की तरफ से शुक्रवार को सफाई आई है। सरकार ने देश में लॉकडाउन लगने की बात को अफवाह बताया है। सरकार के 3 बड़े मंत्री निर्मला सीतारमण, किरेन रिजिजू और हरदीप पुरी ने बयान जारी किए। कहा कि ये सिर्फ अफवाहें हैं।
कोई लॉकडाउन नहीं लगेगा- सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मुझे हैरानी है कि कुछ नेता कह रहे हैं कि लॉकडाउन होगा और फ्यूल की कमी होगी। ये बेबुनियाद बातें हैं। राजनीतिक डोमेन में बैठे लोगों की तरफ से ऐसी बातें चिंता की बात हैं। कोविड के दौरान जैसा लॉकडाउन हमने देखा, वैसा कोई लॉकडाउन नहीं होगा। मैं लोगों को भरोसा दिलाना चाहती हूं कि कोविड के दौरान जैसा लॉकडाउन हमने देखा, वैसा कोई लॉकडाउन नहीं होगा।
लॉकडाउन की अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “ये अफवाहें कौन फैला रहा है? प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि किसी तरह की घबराहट नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी है कि पैनिक न करें। साथ ही राज्य सरकारों से कहा गया है कि जमाखोरी को रोका जाए और कोई भी ऐसी स्थिति न बनने दी जाए जिससे लोगों में डर फैले।”
केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार पूरी तरह स्थिति पर नियंत्रण में है। साथ ही राज्य सरकारों को उनकी जिम्मेदारी भी याद दिलाई। जब केंद्र सरकार ने इतना बड़ा फैसला लिया है, तो राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे सुनिश्चित करें कि कहीं भी गैस, पेट्रोल और डीजल की कमी न हो। इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

