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    मनमोहन सिंह के खिलाफ ‘अशोभनीय बदनामी’ के लिए PM मोदी ‘खुद को माफ’ कर सकते हैं—सोनिया गांधी

    Jodhpur HeraldBy Jodhpur HeraldAugust 11, 2026

    पूर्व प्रधानमंत्री कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में CBI की क्लीन चिट को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र करते हुए सोनिया ने इंडियन एक्सप्रेस के कॉलम में लिखा कि डॉ. सिंह को ‘हर मामले में सही साबित किया गया है’.

    नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई अपनी टिप्पणी के लिए खुद को “माफ करने” को कहा है. उस टिप्पणी में मोदी ने कहा था कि सिंह को “रेनकोट पहनकर नहाने की कला” आती है.

    पूर्व प्रधानमंत्री कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की क्लीन चिट को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का ज़िक्र करते हुए गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा है. इसमें उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ “बदले की भावना से जांच” की गई थी. उन्होंने लिखा, “उनके खिलाफ लॉबी संगठित और अच्छी तरह से तैयार थी, जिसमें नौकरशाही से लेकर मीडिया, न्यायपालिका, नागरिक समाज और निश्चित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तक के लोग शामिल थे. आज उनका यह झूठा अभियान आखिरकार शून्य के नतीजे पर पहुंच गया है. डॉ. सिंह हर मामले में सही साबित हुए हैं.”

    गांधी ने पीएम मोदी की अपने पूर्ववर्ती के खिलाफ की गई ‘रेनकोट’ वाली टिप्पणी को संसदीय इतिहास का सबसे निचला बिंदु बताया और माफी की मांग की. उन्होंने मोदी के हालिया इंस्टाग्राम वीडियो का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ “अपशब्द” इस्तेमाल करने वाले छात्रों को माफ किया था.

    उन्होंने लिखा, “यह कोई संयोग नहीं है कि प्रधानमंत्री डॉ. सिंह पर हमले के सबसे मुखर समर्थकों में भी शामिल थे. 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में उनकी तंज भरी और बेहद खराब टिप्पणी कि सिर्फ डॉ. सिंह ही जानते हैं कि ‘रेनकोट पहनकर नहाने की कला’ क्या होती है, हमारे संसदीय इतिहास के सबसे निचले बिंदु के रूप में दर्ज होगी. चूंकि मिस्टर मोदी इन दिनों भारत के छात्रों को अपने खिलाफ हमला करने के लिए ‘माफ’ कर रहे हैं, शायद वह इस मौके का इस्तेमाल डॉ. सिंह के खिलाफ की गई अपनी अशोभनीय टिप्पणी के लिए खुद को माफ करने के लिए कर सकते हैं.”

    गांधी की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के 29 जुलाई के फैसले के बाद आई है, जिसमें कथित कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सिंह को सीबीआई की क्लीन चिट को बरकरार रखा गया था. अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने और सिंह के खिलाफ बिना किसी “ठोस कारण” के प्रतिकूल टिप्पणियां करने पर ट्रायल कोर्ट को भी फटकार लगाई थी.

    गांधी ने आगे लिखा कि उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाने वाले अभियान में नौकरशाही, मीडिया, न्यायपालिका और नागरिक समाज के कुछ हिस्सों के साथ-साथ आरएसएस और बीजेपी भी शामिल थे. गांधी ने मोदी सरकार पर राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया.

    “नेताओं को या तो दबाव डालकर चुप करा दिया जाता है या चालाकी से बीजेपी में शामिल कर लिया जाता है या कुछ असाधारण मामलों में उन्हें मंत्री पद भी दे दिया जाता है. जब भ्रष्टाचार के विश्वसनीय आरोप सामने आते हैं, तो मोदी सरकार उन्हें आसानी से नजरअंदाज कर देती है. विपक्ष में रहते हुए भ्रष्ट, और जैसे ही पार्टी बदलते हैं, अचानक साफ-सुथरे!”

    उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सिंह के 10 साल के दौरान हुई आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती खपत और निजी निवेश की ओर भी इशारा किया. गांधी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने उसके बाद के 12 वर्षों की तुलना में अधिक आर्थिक वृद्धि दर्ज की और तर्क दिया कि इस दौरान लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया.

    “डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने आर्थिक बदलाव के एक नए दौर की शुरुआत की, जिसमें अभूतपूर्व आर्थिक विकास दर और खपत तथा निजी निवेश में तेजी आई, जिससे हम मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंच गए. 2008 में, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट और गिरावट का सामना कर रही थी, भारत ने अपनी मजबूती दिखाई. उनके कार्यकाल के दौरान रोजगार के पैटर्न में बदलाव बहुत साफ दिखाई देने लगा और लाखों लोग ज्यादा उत्पादक कामों की ओर गए. हालांकि, पिछले एक दशक में इस विविधता को उलट दिया गया है. पिछली सरकार में शुरू किए गए कार्यक्रमों और विकास दर में तेजी के आधार पर भारत ने गरीबी और अभाव के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक रूप से जीत हासिल करना शुरू किया. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की जीडीपी की वृद्धि की गणना के तरीके में बदलाव के बावजूद, यूपीए सरकार के 10 वर्षों में पिछले 12 वर्षों की तुलना में अधिक आर्थिक वृद्धि हुई, जिसके कारण लाखों लोग गरीबी से बाहर निकले.”

    गांधी ने कहा कि सिंह की “राजनेता जैसी समझ, विद्वता और बुनियादी शालीनता” की “आज के टकराव भरे समय में बहुत कमी महसूस होती है.” उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल को अब तेजी से “निर्णायक आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक प्रगति” के दौर के रूप में पहचाना जा रहा है.

    उन्होंने सिंह सरकार के प्रमुख कदमों में शिक्षा का अधिकार कानून, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) जैसे केंद्र से वित्त पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण, वन अधिकार कानून, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 को भी गिनाया.

    MGNREGA पर गांधी ने लिखा कि यह “सबसे शक्तिशाली सामाजिक सुरक्षा योजना” थी और कोविड महामारी के दौरान गरीब और कमजोर वर्गों तक पहुंचने में इसकी भूमिका का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून एक और बड़ा माध्यम था, जिसके जरिए सरकार करोड़ों परिवारों को जरूरी खाद्य राशन उपलब्ध करा सकी.

    गांधी ने सिंह के समय के लोकतांत्रिक माहौल और मौजूदा सरकार के बीच भी तुलना की. उन्होंने लिखा, “राजनीतिक रूप से, प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह का दशक राज्य और नागरिक समाज की लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास और मजबूती के लिए जाना जाता था. डॉ. सिंह ने ऐतिहासिक सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के जरिए सरकार में पारदर्शिता के एक नए दौर की शुरुआत की, जिसने नागरिकों को सरकार के अंदरूनी कामकाज तक पहुंचने में सक्षम बनाया. आरटीआई अब पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है. स्वतंत्र मीडिया में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई थी, जिसमें बिना डर के काम करने की भावना थी. आज की कमजोर स्थिति के मुकाबले यह और भी ज्यादा उल्लेखनीय लगती है.”

    उन्होंने आगे कहा, “नागरिक समाज एक ऐसी ताकत बनकर उभरा जिससे सरकार को गंभीरता से निपटना पड़ता था और हमारे छात्रों को सरकार और यहां तक कि प्रधानमंत्री के खिलाफ भी प्रदर्शन करने की आजादी थी, बिना इस डर के कि उन पर धातु की गोलियां या एके-47 से गोलियां चलाई जाएंगी.”

    उन्होंने संसद और मीडिया के साथ सिंह के संवाद का भी ज़िक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने 100 से अधिक बिना लिखी हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौता भी एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसने भारत के खिलाफ दशकों से चले आ रहे परमाणु भेदभाव को खत्म किया और वैश्विक मंच पर भारत के आने का रास्ता बनाया. गांधी ने कहा, “हम सभी निश्चित रूप से दुखी हैं कि वह इस दिन को देखने के लिए यहां नहीं हैं.”

    हालांकि, उन्होंने कहा कि यह राहत की बात है कि जनवरी 2014 में सिंह की भविष्यवाणी अब तेजी से सच होती दिखाई दे रही है.

    उन्होंने कहा कि इतिहास सिंह को “एक शांत, विनम्र लेकिन बेहद महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री” के रूप में याद रखेगा.

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