NCERT ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 8वीं की नई सोशल साइंस किताब जारी की है। ज्यूडिशियरी, नेताजी, बंटवारा और सावरकर से जुड़े अध्यायों में बड़े बदलाव किए गए हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कक्षा 8 की सोशल साइंस की संशोधित किताब जारी कर दी है। नई पुस्तक में सिर्फ न्यायपालिका (ज्यूडिशियरी) वाले अध्याय में ही नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भारत के बंटवारे और विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े हिस्सों में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद किया गया, जिसमें पुराने संस्करण को वापस लेने और उसकी जगह नया संस्करण प्रकाशित करने को कहा गया था।
नेताजी, बंटवारा और सावरकर से जुड़े अध्यायों में क्या बदला?
संशोधित पुस्तक ‘समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे’ में आजाद हिंद फौज के गठन से जुड़े नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संदर्भों में बदलाव किया गया है। पहले किताब में लिखा था कि नेताजी ने ‘हिटलर’ से मदद मांगी थी और हिटलर को उसकी ‘नस्लवादी नाजी विचारधारा और विस्तारवादी लक्ष्यों’ के कारण दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने से जोड़ा गया था। नए संस्करण में हिटलर और नाजी विचारधारा से जुड़े ये सभी संदर्भ हटा दिए गए हैं। अब केवल यह कहा गया है कि नेताजी ने सेना खड़ी करने के लिए ब्रिटिश विरोधी ताकतों से समर्थन मांगा था।
इतिहास के अध्याय ‘India’s Long Road to Independence’ में भारत के बंटवारे को लेकर भी बदलाव किया गया है। अब किताब में लिखा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विभाजन का व्यापक विरोध किया था और इसे स्वीकार करना ही एकमात्र रास्ता था या नहीं, यह आज भी बहस का विषय है।
वहीं, पुरानी किताब में मौजूद वह पंक्ति हटा दी गई है, जिसमें कहा गया था कि विभाजन के दौरान जब उपमहाद्वीप में सांप्रदायिक कत्लेआम हो रहा था, तब कांग्रेस नेता बेबस थे। इसके अलावा संशोधित पुस्तक में यह भी जोड़ा गया है कि 1925 में विनायक दामोदर सावरकर ने भी स्वराज की मांग की थी, जबकि पिछले संस्करण में इसका उल्लेख नहीं था।
विवाद के बाद ज्यूडिशियरी वाले अध्याय को पूरी तरह दोबारा लिखा गया है। अब इसमें न्यायपालिका की आलोचना से हटकर उसकी संवैधानिक भूमिका और कार्यों को समझाने पर जोर दिया गया है। पहले जहां न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, न्यायिक देरी और न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों जैसे मुद्दों का जिक्र था, उन्हें हटाकर अब भारतीय न्यायपालिका की संरचना, संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत उपलब्ध संवैधानिक उपाय, पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL), ट्रिब्यूनल, आर्बिट्रेशन और मीडिएशन जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान के तरीकों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही ई-फाइलिंग, हाइब्रिड कोर्ट हियरिंग और अदालत की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग जैसी हालिया तकनीकी पहलों की जानकारी भी दी गई है।
NCERT ने प्रकाशित किया नया संस्करण
संशोधित किताब के एक्नॉलेजमेंट सेक्शन में कहा गया है कि यह संस्करण एक समीक्षा प्रक्रिया के बाद प्रकाशित किया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एक स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) रिट याचिका में की गई थी। इसमें यह भी बताया गया है कि ज्यूडिशियरी वाले अध्याय को शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप दोबारा तैयार किया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने कंटेंट का स्वत: संज्ञान लेते हुए ज्यूडिशियरी अध्याय के कुछ हिस्सों को आपत्तिजनक बताया था। अदालत ने NCERT को किताब की सभी प्रिंट और डिजिटल प्रतियां वापस लेने, उनके प्रसार पर रोक लगाने और संशोधित संस्करण प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद NCERT ने इसे ‘Error of Judgement’ बताते हुए माफी मांगी और शिक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद यह नया संस्करण जारी किया।

