Close Menu
Jodhpur HeraldJodhpur Herald
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • ट्रेंडिंग न्यूज
    • राजनीति
    • कारोबार
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • शिक्षा/करियर
    • राजस्थान के जिले
      • अजमेर
      • अलवर
      • उदयपुर
      • कोटा
      • चित्तौड़गढ़
      • चुरु
      • जयपुर
      • जालौर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
      • झालावाड़
      • झुंझुनू
      • टोंक
      • डूंगरपुर
      • दौसा
      • धौलपुर
      • नागौर
      • पाली
      • प्रतापगढ़
      • बाड़मेर
      • बाराँ
      • बांसवाड़ा
      • बीकानेर
      • बूंदी
      • भरतपुर
      • भीलवाड़ा
      • राजसमंद
      • श्रीगंगानगर
      • सवाई माधोपुर
      • सिरोही
      • सीकर
      • हनुमानगढ़
    • संपादकीय
    What's Hot

    विधानसभा उपचुनाव: बांकीपुर से जीते प्रशांत किशोर, दतिया में कांग्रेस और मांजलपुर में बीजेपी ने दर्ज की जीत

    August 3, 2026

    शशि थरूर लिखते हैं: परिसीमन का ‘ट्रोजन हॉर्स’ और हमारे लोकतंत्र के स्वरूप से जुड़े बुनियादी सवाल। संसद में सदस्यों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ

    August 3, 2026

    खड़गे का PM पर हमला, ‘रात 12 बजे इंस्टाग्राम पर आ सकते हैं तो संसद में क्यों नहीं? पैलेट गन चलाने वाले माफी मांगें’

    August 3, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, August 4
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Jodhpur HeraldJodhpur Herald
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • ट्रेंडिंग न्यूज
    • राजनीति
    • कारोबार
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • शिक्षा/करियर
    • राजस्थान के जिले
      1. अजमेर
      2. अलवर
      3. उदयपुर
      4. कोटा
      5. चित्तौड़गढ़
      6. चुरु
      7. जयपुर
      8. जालौर
      9. जैसलमेर
      10. जोधपुर
      11. झालावाड़
      12. झुंझुनू
      13. टोंक
      14. डूंगरपुर
      15. दौसा
      16. धौलपुर
      17. नागौर
      18. पाली
      19. प्रतापगढ़
      20. बाड़मेर
      21. बाराँ
      22. बांसवाड़ा
      23. बीकानेर
      24. बूंदी
      25. भरतपुर
      26. भीलवाड़ा
      27. राजसमंद
      28. श्रीगंगानगर
      29. सवाई माधोपुर
      30. सिरोही
      31. सीकर
      32. हनुमानगढ़
      Featured

      PM बोले- भारत सबसे बड़े ऊर्जा संकट से उबरा:, राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया

      July 4, 2026
      Recent

      PM बोले- भारत सबसे बड़े ऊर्जा संकट से उबरा:, राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया

      July 4, 2026

      मंडोर गार्डन में दर्दनाक हादसा: टॉय ट्रेन से गिरी 5 साल की मासूम, मौत

      June 2, 2026

      जोधपुर में आंधी-तूफान का कहर: 12 हजार बिजली पोल धराशायी, 1100 से अधिक गांवों में अंधेरा

      June 2, 2026
    • संपादकीय
    Jodhpur HeraldJodhpur Herald

    प्रकृति को नेस्तनाबूद करते ही संस्कृति खुद-ब-खुद विलीन हो जाएगी, सिर्फ बचेगा बाजार !

    Jodhpur HeraldBy Jodhpur HeraldJanuary 19, 2026
    A habitat image where this female tiger calling her cubs after having a sambar deer kill to feed by them at Ranthambore Tiger Reserve, India

    घाटियों-पहाड़ों का खरबों साल का इतिहास बताता है कि वे बहुत पहले के हैं। सेपियन्स और आदि मानव से भी पहले के हैं। वे तो अपना रुख मोड़ लेंगे। मगर तब तक शायद हम नहीं बचेंगे।

    मीनाक्षी नटराजन

    Published: 18 Jan 2026, 5:56 PM

    माधव गाडगिल नहीं रहे। गाडगिल ने भारतीय पारिस्थिकी केन्द्र के संस्थापक और संचालक के रूप में गहन पर्यावरणीय काम किया। यह भी कह सकते हैं कि उन्होंने एक पूरी सदी की औपनिवेशिक पर्यावरणीय समझ को चुनौती दी। वन्य प्राणी अभ्यारण्य, नैसर्गिक विशिष्ट संरक्षित स्थान बनाना अपने आप में अंग्रेजी साम्राज्यवादी विस्तार की देन थी। प्रकृति और मानव समाज के लिए अलग-अलग रिहायशी इलाके तय करना उसी का भाग है, वरना सदियों से स्थानीय जन समूह प्रकृति के साथ प्राकृतस्थ होकर रहते रहे हैं। उनकी जीवन शैली में ऐसा कोई खाका नहीं है। आज भी सर्वाधिक वन संपदा उन्हीं इलाकों में है जहां जनसमूह की घनी आबादी है। उनकी संस्कृति प्रकृति में बसती है।

    इस दौर में सत्तारूढ़ लोग संस्कृति के प्रति बड़ी चिंता जता रहे हैं। संस्कृति को भले ही कई पाश्चात्य मानवशास्त्री मिथक मानते हैं, संस्कृति इन मिथकों से भले पोषित होती है, पर संस्कृति ही सभ्यता की कहानियां कहती है, वह सभ्यता का ननिहाल है। सांस्कृतिक तजुर्बे को सहेजना हर देश के लिए जरूरी है। पर यह याद रखना चाहिए कि संस्कृति का बीज प्रकृति है। बिना प्रकृति के किसी तहजीब का कोई मायने नहीं है।

    प्रकृति को नेस्तनाबूद करते ही संस्कृति खुद-ब-खुद विलीन हो जाएगी। शेष बचेगा बाजार। गंगा-जमुनियत पर थोपा जा रहा बाजार और एकाधिपत्य हमारी हिमालयी संस्कृति और प्रकृति की जड़ों को काट रहा है। यदि भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति को समझना है तो पहले उसकी प्रकृति को समझना होगा। उस प्रकृति ने हमें पहचान दी है और सांस्कृतिक चेतना को पनपाया है। ख्याल रहे कि भारत के आबाद होने के बहुत पहले हमारी प्रकृति बन चुकी थी। पारिस्थिकी ढांचा तैयार होने लगा था।

    आज हम वह देश हैं जहां दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे छोटी पहाड़ी है। ऐसी नदियां हैं, जो बहुत छोटी है और ऐसी जो बहुत पुरानी। आज हमारी दोनों पहाड़ियों का अस्तित्व डगमगा रहा है। हमारे स्वार्थ और बाजार के कारण।

    भारत की प्रकृति का भूगर्भीय इतिहास इतना सुंदर, पुराना और कौतूहल भरा है कि उसकी समय-सीमा की सहज कल्पना नहीं की जा सकती। अरावली की पहाड़ी तब बन चुकी जब भारत आज के भूगोल का भाग नहीं था। जब भारत, अफ्रीका, मेडागास्कर आदि एक साथ थे। यहां तक कि सबसे पुराने प्रायद्वीपों के बनने और बिछुड़ने से पहले वह बनने लगा था। अरावली की पहाड़ी तीन बिलियन साल की विरासत को संजोए हुए है जबकि प्राचीनतम प्रायद्वीप कोलंबिया, रोदिनिया और गोंडवाना भी बने-बिछुड़े नहीं थे। गोया कि यह सारे नाम भूगर्भ वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए हैं। जब दो क्रेटनिक पत्थर समूह टकराए, तब अरावली की पहाड़ियां बनने लगीं। यह आज भी उतने साल पहले की भूगर्भीय निशान को धारण करती है।

    अरावली पहाड़ की प्राचीनतम चगोस लखदीव चोटी का दक्षिणी हिस्सा अरब सागर में डूबा हुआ है। इसी चोटी पर लक्षद्वीप के मूंगा प्रवाल वलय बने हैं। उन पर मूंगा वलय दिखाई देते हैं। यानी अरावली की दक्षिणी चोटी पर ही लक्षद्वीप के प्रवाल हैं। कितनी हैरतंगेज बात है कि उत्तर भारत की एक निष्ठुर पर्वत श्रृंखला का दक्षिणी भाग प्रवाल समुद्री द्वीप में तब्दील हो गया। वह भी आज जलवायु परिवर्तन से जूझ रहा है। अरावली ही है जो उत्तर भारत को अनावश्यक बवंडर, मौसमी दबाव से बचाती है। हमारे तहजीब को तटस्थता प्रदान करती है।

    ऐसी ही विरासत पश्चिम और पूर्वी घाटी की पर्वत श्रृंखलाओं की है। माधव गाडगिल ने अपने जीवन का लंबा समय पश्चिम घाटी को संवर्धित करने के जन प्रयास में बिताए। पश्चिम घाटी की ढलान और उठाव भारत के यूरेशियाई टकराव का नतीजा है। जब अरब सागर बन गया और हमारी पारिस्थिकी स्थान में आमूल परिवर्तन आया- करीब 200 से 150 मिलियन साल पहले। आज की पूर्व की ओर बहती पश्चिमी नदियां उस टकराव से भी पहले की जल व्यवस्था है। पूर्वी घाटी में आज भी पूर्वी अंटार्टिका के पहाड़ी चिन्ह और वानस्पतिक समताएं देखी जाती हैं।

    हिमालय की पहाड़ी उसी भूगर्भीय टकराव का नतीजा है- सबसे शैशव अवस्था के पहाड़। ऐसे ही अंडमान के द्वीप समुद्री तल में दब चुके मलेशियाई पहाड़ श्रृंखला का हिस्सा हैं।

    आज इन सब पर हमला जारी है। मानव इतिहास में एक तरफ स्वार्थवश तेजी से प्रकृति के दोहन की मिसाल है, तो दूसरी तरफ जन समूहों के द्वारा अपनी प्रकृति के साथ सौहार्दमय जीवन जीने के भी अनेक उदाहरण हैं। जल, जंगल, जमीन के साथ के अंतर्संबंध निसर्ग को जीवंत रखते हैं। वन विभाग के बजाय जन समूह के जरिये वन संवर्धन की पहल माधव गाडगिल जी का बड़ा योगदान था। हालांकि व्यावसायिक चाय काफी बागान मालिकों ने उनकी रिपोर्ट को लागू होने नहीं दिया। उसकी गहन आलोचना हुई, उन्हें जन विरोधी कहा गया। मगर उनकी अपनी प्रतिबद्धता विज्ञान और पर्यावरण को लोकोन्मुखी बनाने पर अडिग रही।

    जब पर्यावरण की बात आती है, तब यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि बात पर्यावरण बचाने की नहीं है। इन सब घाटियों-पहाड़ों का खरबों साल का इतिहास यह बताता है कि वे इतिहास से बहुत पहले के हैं। सेपियन्स और आदि मानव से भी पहले के हैं। उनके सामने भौतिकी, रसायनिकी और जीव विज्ञान पनपे। वे इस धरती के पहले-पहल निवासी हैं। तो वे अपना ख्याल रख लेंगे, अपने को बदल लेंगे, अपना रुख मोड़ लेंगे। मगर तब तक शायद हम नहीं बचेंगे।

    गाडगिल इस बात को पक्के तौर जान गए थे और इसलिए निरंतर जन समूहों के साथ वानिकी को समझने-सहेजने में लगे रहे। आज के घोर संकट काल में यही एकमात्र रास्ता है कि जन समुदाय के नैसर्गिक विवेक के साथ अपने को बचाया जाए। अरावली पश्चिम पूर्वी घाटी हिमालय तो खुद को बचा ही लेंगे। धरती अपने को मोड़ ही लेगी। वरना संस्कृति को विकृति होने से कोई नहीं बचा पाएगा।

    Post Views: 122

    Related Posts

    यह कैसा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’

    August 3, 2026

    नेतृत्व की विश्वसनीयता और लोकतंत्र की परीक्षा

    July 21, 2026

    वांगचुक को भले ही सरकार ने हटा दिया, लेकिन देशवासियों के सामने खुल गई सरकारी सिस्टम की पोल

    July 20, 2026

    राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस की कमजोर होती पकड़ भारत को एक-दलीय व्यवस्था की दिशा में धकेल रही है

    July 10, 2026

    इतिहास बनाम हिन्दुत्ववादी मिथक

    July 6, 2026

    सोमनाथ के लुटने से लेकर अयोध्या में ‘चंदा चोरी‘ तक

    July 2, 2026
    -advertisement-
    Top Posts

    पाली के देसूरी नाल हादसे में तीन स्कूली बच्चियों की मौत

    December 9, 202428 Views

    पूजा स्थल अधिनियम को दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी। इसे दोबारा क्यों देखें?

    December 5, 2024100 Views

    ‘1.5 करोड़ पेड़ काट दिए गए, ताकि एक बिजनेसमैन…’, ग्रेट निकोबार को लेकर मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

    June 5, 202617 Views
    -advertisement-
    Stay In Touch
    • Facebook
    • YouTube
    • Twitter
    • Instagram
    Recent News

    विधानसभा उपचुनाव: बांकीपुर से जीते प्रशांत किशोर, दतिया में कांग्रेस और मांजलपुर में बीजेपी ने दर्ज की जीत

    August 3, 2026

    शशि थरूर लिखते हैं: परिसीमन का ‘ट्रोजन हॉर्स’ और हमारे लोकतंत्र के स्वरूप से जुड़े बुनियादी सवाल। संसद में सदस्यों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ

    August 3, 2026

    खड़गे का PM पर हमला, ‘रात 12 बजे इंस्टाग्राम पर आ सकते हैं तो संसद में क्यों नहीं? पैलेट गन चलाने वाले माफी मांगें’

    August 3, 2026
    Most Popular

    पाली के देसूरी नाल हादसे में तीन स्कूली बच्चियों की मौत

    December 9, 202428 Views

    पूजा स्थल अधिनियम को दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी। इसे दोबारा क्यों देखें?

    December 5, 2024100 Views

    ‘1.5 करोड़ पेड़ काट दिए गए, ताकि एक बिजनेसमैन…’, ग्रेट निकोबार को लेकर मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

    June 5, 202617 Views
    Contact Us

    CHIEF EDITOR
    Hanuman Mandar

    ADDRESS
    Office No. 4 Opp. Jai Hind Bal Mandir School Jalori Gate Jodhpur 342001, Rajasthan

    CONTACT NO.
    0291-2640948

    EMAIL
    jodhpurherald@gmail.com

    WEB ADDRESS
    www.jodhpurherald.com

    © 2026 www.jodhpurherald.com. Designed by www.WizInfotech.com.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.