बीजेपी की ओर से मोर्चा संभालने वालों में पार्टी सांसद निशिकांत दुबे और आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय शामिल थे. कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत का कहना है कि गोड्डा सांसद की कोई अहमियत नहीं है.
नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं का विरोध लगातार तेज हो रहा है. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि “छात्रों के गुस्से को विदेशी ताकतों ने हाईजैक कर लिया है और अब इस आंदोलन को देश विरोधी ताकतें चला रही हैं.”
गोड्डा से सांसद दुबे ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू का प्रदर्शन के लिए 10,000 करोड़ रुपये देने का बयान बेहद गंभीर मामला है.
उन्होंने संसद परिसर में कहा, “भारत के खिलाफ काम करने वाली विदेशी ताकतें, जिनमें खालिस्तानी संगठन, बांग्लादेश की इस्लामिक पार्टी की ताकतें, पाकिस्तान समर्थित ताकतें और सोरोस फाउंडेशन से जुड़े समूह शामिल हैं, पहले से ही देश में सक्रिय हैं.”
उन्होंने कहा, “यही ताकतें और लॉबी, जो पहले धर्म परिवर्तन के मामलों में सक्रिय थीं और जिनकी गतिविधियों पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री द्वारा FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत रोक लगाई गई थी, अब इस मुद्दे को भड़काने की कोशिश कर रही हैं.”
एक अन्य पोस्ट में, जो मूल रूप से हिंदी में था, दुबे ने प्रदर्शन के लिए हो रही फंडिंग पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा, “पैसा कहां से आ रहा है? साजिश क्या है? राहुल गांधी पिछले 20 दिनों में विदेश दौरे के दौरान किन लोगों से मिले? असली खिलाड़ी कौन है?”
दुबे के आरोपों का समर्थन बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी किया. उन्होंने दावा किया कि ये प्रदर्शन पहले से ही योजनाबद्ध थे.
उन्होंने X पर लिखा, “लगातार तीन दिन तक हुई पहले से तय और बिना उकसावे की हिंसा से एक बात साफ हो जाती है कि पहले दिन हुई पत्थरबाजी और हिंसा अचानक नहीं हुई थी. ऐसा लगता है कि इसकी पहले से पूरी तैयारी की गई थी. असली छात्रों को राजनीतिक विपक्ष के उन वर्गों से बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, जो इस तोड़फोड़ और अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं.”
मालवीय ने आगे कहा कि छात्रों के नाम पर हो रहे इन प्रदर्शनों में “कुछ बहुत ही खतरनाक” बात है.
उन्होंने कहा, “प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों का शिक्षा सुधार या छात्रों की भलाई से बहुत कम संबंध था. इसके बजाय पूरा जोर चुनाव के बजाय दूसरे तरीकों से चुनी हुई सरकार को गिराने पर था. नेपाल और बांग्लादेश का बार-बार जिक्र इस आंदोलन के पीछे की राजनीतिक मंशा को साफ दिखाता है.”
उन्होंने कहा, “इसके बाद बयानबाजी शुरू हुई. अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लेकर हर सीमा पार कर दी. यह छात्र आंदोलन नहीं है. यह अशांति फैलाने और क्रांति का माहौल बनाने की राजनीतिक कोशिश है. लेकिन यह नाकाम होगी, क्योंकि भारत के लोग लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, अराजकता में नहीं.”
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) पेपर लीक को लेकर देशभर के छात्रों और अभिभावकों के गुस्से को सामने ला दिया है.
नरेंद्र मोदी सरकार ने विपक्ष से इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करने की अपील की है. सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों पर चर्चा के लिए संसद ही सही मंच है.
निशिकांत दुबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि बीजेपी का यह पुराना तरीका है और उन्हें पहले से इसकी उम्मीद थी.
उन्होंने कहा, “इसमें कुछ भी नया नहीं है. हमें पहले से पता था कि ऐसा होगा और हम इसी का इंतिजार कर रहे थे. बीजेपी को अब नया स्क्रिप्ट राइटर ढूंढ लेना चाहिए. जब भी कोई जवाबदेही तय करने की कोशिश करता है, बीजेपी कहती है कि किसानों, महिला खिलाड़ियों और अब युवाओं को कोई अंतरराष्ट्रीय साजिश भड़का रही है. वह यह मानने को तैयार ही नहीं है कि उसकी पकड़ कमजोर हो चुकी है.”
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आगे कहा कि जब पूरे देश में गुस्सा और नाराजगी है, लोग अपने भविष्य को लेकर निराश हैं और उन्हें लगता है कि किसी की कोई जवाबदेही नहीं है, तब बीजेपी इस तरह का नैरेटिव चलाने में लगी हुई है.
उन्होंने कहा, “सरकार ने NEET के तथाकथित सफल री-टेस्ट का जश्न भी मनाया, जबकि इतने सारे युवाओं की मौत हो चुकी थी. पूरी शिक्षा व्यवस्था बिखर चुकी है. युवा सड़कों पर हैं, लेकिन मोदी और शाह कहीं नजर नहीं आ रहे. उनकी जगह अब बीजेपी नड्डा को आगे कर रही है. सवाल यह है कि प्रधानमंत्री सदन में क्यों नहीं आ रहे? और जहां तक निशिकांत दुबे की बात है, उनकी कोई खास अहमियत नहीं है, क्योंकि वह कई बार झूठ बोलते पकड़े जा चुके हैं.”

