केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह ‘बच्चों की समस्याओं’ का ध्यान रखेगी; इन समस्याओं की निगरानी और देखरेख सीनियर लेवल पर की जा रही है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह NEET में चल रही अस्थायी व्यवस्था को खत्म करेगा और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था को संस्थागत बनाएगा. अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाया जाएगा, तो डेटा को सुरक्षित रखने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी. इस पर विस्तृत जवाब देने को कहा गया.
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा में भी डेटा लीक हो सकता है. लेकिन सरकार इस बदलाव को सुरक्षित कैसे बनाएगी, इस पर ध्यान देना जरूरी है. कोर्ट ने सरकार को एक हफ्ते का समय दिया और सुनवाई के दौरान उठाए गए सभी मुद्दों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा.
बेंच ने कहा, “हम एक कदम आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करेंगे कि यह व्यवस्था पूरी तरह संस्थागत हो. इसे ऐसे नहीं चलने दिया जा सकता. हमें गलतियों के इस सिलसिले से बाहर निकलना होगा. हम इस पर करीबी नजर रखेंगे.” कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की.
बेंच NEET में जवाबदेही से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. ये याचिकाएं NEET पेपर लीक की खबरें सामने आने के बाद दाखिल की गई थीं.
हालांकि केंद्र सरकार को शुक्रवार से पहले अपना जवाब दाखिल करना था, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार को इसके लिए थोड़ा और समय चाहिए. उन्होंने बेंच को बताया कि इस मामले में कुछ नए घटनाक्रम होने वाले हैं, जिन्हें सरकार कोर्ट के सामने रखना चाहती है.
राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बेंच ने मेहता से कहा कि रिपोर्ट में दिए गए कई सुझावों पर विचार किया जाए.
बेंच ने कहा, “रिपोर्ट में परीक्षा को कंप्यूटर आधारित करने का सुझाव दिया गया है. ऐसे में सरकार का क्या प्रस्ताव है. साइबर सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी. इसकी जिम्मेदारी किसके पास होगी. उम्मीदवारों का सत्यापन कैसे होगा.”
जजों ने परीक्षा व्यवस्था के डिजिटलीकरण को लेकर भी चिंता जताई और पूछा कि इसे सुरक्षित कैसे रखा जाएगा.
मेहता ने भरोसा दिलाया कि सरकार बच्चों की समस्याओं का पूरा ध्यान रखेगी. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निगरानी और देखरेख वरिष्ठ स्तर पर की जा रही है.
सुनवाई की शुरुआत में ही बेंच ने अस्थायी व्यवस्था पर टिप्पणी की.
बेंच ने कहा, “यह बात हमें परेशान कर रही है. संस्थागत व्यवस्था जरूरी है.”
जजों ने राधाकृष्णन समिति द्वारा सुझाए गए 10 क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बताए कि उन्हें कैसे बनाया जाएगा और उनका संचालन कैसे होगा.
कोर्ट ने मेहता से यह भी कहा कि परीक्षा के तीनों चरणों. परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद. उठाए जाने वाले कदमों की पूरी जानकारी दी जाए.
कोर्ट ने कहा, “परीक्षा से पहले के चरण में हम जानना चाहते हैं कि क्या व्यवस्था होगी. अलग-अलग राज्यों और जिलों में कौन-कौन सी संस्थाएं परीक्षा कराएंगी. इन संस्थाओं की संरचना क्या होगी.” कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या NEET परीक्षा अब JEE की तरह कराई जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्र छापने और उन्हें पहुंचाने की व्यवस्था पर भी चर्चा की.
कोर्ट ने कहा, “इस साल आपने भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद ली थी. यह एक अस्थायी व्यवस्था थी.”
मेहता ने कहा कि सरकार यह भरोसा दिला सकती है कि बच्चों के खिलाफ उसका कोई टकराव वाला रवैया नहीं है.
उन्होंने कहा, “हम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट से भी आगे जाकर कदम उठा सकते हैं.

