जब NRI डॉलर जमा करते हैं और बैंक उन्हें RBI के साथ बदलते हैं, तो बदले में RBI जो रुपये देता है, वे खत्म नहीं होते. इसके बजाय, वे बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ा देते हैं.
केंद्रीय बैंकों का आकलन अक्सर उन वादों के आधार पर किया जाता है, जिन्हें वे पूरा नहीं कर पाते, न कि उन वादों के आधार पर जिन्हें वे पूरा करते हैं. तीन हफ्ते पहले मैंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गैर-निवासी भारतीय यानी NRI जमा योजना में किए गए बदलाव पर एक कॉलम लिखा था. RBI ने योजना को समय से पहले बंद करने की संभावना से इनकार करने के नौ दिन बाद अपना फैसला बदल दिया था. यह लेख इस बारे में है कि जब RBI ने अपना हर वादा पूरा किया, योजना को पूरी अवधि तक चलने दिया, जो बेहद सफल रही और आखिर में उसे शुरुआत से भी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा, तो क्या हुआ.
फिलहाल स्थिति यह है: 5 अगस्त को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि RBI की खास NRI जमा सुविधा को समय से पहले बंद करने का कोई इरादा नहीं है. उस समय इस योजना के तहत करीब 28 अरब डॉलर का पैसा आया था.
21 अगस्त तक RBI के आंकड़ों से पता चला कि योजना में सबसे अहम Foreign Currency Non-Resident (Bank) यानी FCNR(B) जमा 65.4 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी. विदेश से लिए गए कर्ज समेत कुल पैसा 72.85 अरब डॉलर हो गया था. 31 अगस्त को इस सुविधा के बंद होने के समय RBI की अंतिम रिपोर्ट में यह रकम 136.37 अरब डॉलर दर्ज की गई. इसमें अकेले FCNR(B) जमा की रकम 127.2 अरब डॉलर थी. यह रकम जून में योजना शुरू होने के समय विश्लेषकों द्वारा लगाए गए 28-50 अरब डॉलर के अनुमान से करीब पांच गुना ज्यादा है. इस दौरान 21 अगस्त को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729.33 अरब डॉलर था, जो एक हफ्ते बाद बढ़कर 740.80 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

