कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि इसका बोझ आखिरकार आम लोगों को ही उठाना पड़ेगा, जिन्हें अब UPI ट्रांज़ैक्शन के इस्तेमाल के लिए पैसे देने होंगे।
लोकसभा ने गुरुवार को ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ में संशोधन करने वाला एक बिल पास किया। यह बिल सरकार को बैंकों और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स को UPI और दूसरे नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों से होने वाले पेमेंट पर चार्ज लगाने की इजाज़त देने का अधिकार देता है।
शोर-शराबे के बीच बिना किसी चर्चा के पास हुए इस संशोधन का मकसद उस मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाना है, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज करने से रोकता है।
RTGS और NEFT के ज़रिए होने वाले रियल-टाइम पेमेंट के लिए सर्विस चार्ज देना पड़ता है। हालांकि, अब तक UPI ट्रांज़ैक्शन को ऐसे चार्ज से छूट मिली हुई थी।
‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट’ में प्रस्तावित बदलाव टैक्स से जुड़े एक बड़े कानून का हिस्सा हैं, जिसे मंगलवार को सदन में पेश किया गया था।
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद लोकसभा में यह बिल ‘वॉयस वोट’ (मौखिक मतदान) से पास हो गया।
क्या PM UPI को कमज़ोर करना चाहते हैं: कांग्रेस
कांग्रेस ने गुरुवार को ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल’ को लेकर सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी UPI को कमज़ोर करना चाहते हैं और अपने “अच्छे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप” के “दबाव” में आकर डिजिटल पेमेंट सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहते हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार का नया बिल उस कानूनी गारंटी को खत्म करता है जो UPI ट्रांज़ैक्शन को मुफ़्त रखती है।
रमेश ने ‘X’ पर कहा कि इससे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का रास्ता खुलता है, जिसे भविष्य में आसानी से सभी पेमेंट पर लागू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इसका बोझ आखिरकार आम लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें अब UPI ट्रांज़ैक्शन इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने होंगे।
रमेश ने कहा, “मोदी सरकार का यह दावा झूठ है कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का यही एकमात्र तरीका है। RBI के पास मर्चेंट या ग्राहकों पर चार्ज लगाए बिना UPI इकोसिस्टम को टिकाऊ ढंग से फंड करने की आर्थिक क्षमता है।”
उन्होंने कहा कि 2025-26 में RBI ने मोदी सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे।
रमेश ने कहा कि इस अहम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए इस सरप्लस ट्रांसफर के एक छोटे से हिस्से की ही ज़रूरत होगी। रमेश ने कहा, “असल में, इस संशोधन को लाने की असली वजह शायद ज़्यादा चिंताजनक है। यह U.S. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की 2026 की रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें UPI और RuPay के मुफ़्त होने की आलोचना की गई है और उन पर वीज़ा (Visa) और मास्टरकार्ड (MasterCard) जैसे अमेरिकी पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म को बाहर करने का आरोप लगाया गया है।”
कांग्रेस महासचिव ने पूछा, “क्या प्रधानमंत्री अपने अच्छे दोस्त (अमेरिकी राष्ट्रपति) डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में UPI को कमज़ोर करना चाहते हैं और डिजिटल पेमेंट सेक्टर को अमेरिकी कारोबारियों के लिए खोलना चाहते हैं?”
उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं होगा।
रमेश ने कहा कि ट्रंप ने खुलेआम कम से कम 100 से ज़्यादा बार दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी टैरिफ की धमकी देकर मोदी सरकार पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अचानक रोकने का दबाव डाला था।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि रूस से तेल आयात धीरे-धीरे कम करने का भारत का फ़ैसला ट्रंप के आदेशों की वजह से लिया गया था।
उन्होंने कहा, “हम यह भी जानते हैं कि मोदी सरकार राष्ट्रपति ट्रंप की दादागिरी के आगे झुक गई और एक बहुत ही अनुचित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मान लिया, जिसमें हमारे किसानों और छोटे कारोबारियों के हितों की बलि दी गई है।”
रमेश ने बिल के उस हिस्से का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।
बिल में कहा गया है, “पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में, ‘इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 269 SU के तहत बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीकों’ शब्दों, अंकों और अक्षरों की जगह ‘एक या ज़्यादा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीके, जिन्हें केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के ज़रिए बताएगी’ शब्द जोड़े जाएंगे। यह बदलाव ऑफ़िशियल गज़ट में इस एक्ट के पब्लिश होने की तारीख से लागू होगा।”
निर्मला सीतारमण ने बिल पेश किया
जैसे ही सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पेश किया। इस बिल का मकसद ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ और ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ में और संशोधन करना तथा ‘फाइनेंस एक्ट, 2026’ में संशोधन करना है, ताकि इन पर विचार किया जा सके। सरकार का मकसद है कि डिजिटल पेमेंट सर्विस इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और छोटे बिज़नेस पर छोटा सा चार्ज लगाया जाए, और साथ ही बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए कमाई का एक टिकाऊ मॉडल भी बना रहे, जो डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को चलाते हैं।
बिल में कहा गया है, “पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में, ‘इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 269SU के तहत बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीके’ शब्दों, अंकों और अक्षरों की जगह ‘एक या उससे ज़्यादा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीके, जिन्हें केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के ज़रिए बताएगी’ शब्द इस्तेमाल किए जाएंगे। यह बदलाव ऑफिशियल गजट में इस एक्ट के पब्लिश होने की तारीख से लागू होगा।”

