यह असहमति ऐसे समय में सामने आई है जब लद्दाख, सितंबर 2025 में लेह में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए चार नागरिकों की याद में ‘शहीद माह’ मना रहा है।
लद्दाख के लेह क्षेत्र के दो वरिष्ठ नेताओं, त्सेरिंग साम्पफेल और रिग्ज़िन स्पालबार ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे संविधान की छठी अनुसूची के तहत शामिल करने की मांग को लेकर प्रस्तावित विरोध मार्च पर चिंता जताई है। इसके बजाय, वे नए बने ज़िलों में स्थानीय हिल काउंसिल के चुनाव कराने पर ज़ोर दे रहे हैं।
लद्दाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल-लेह के पूर्व चेयरमैन श्री स्पालबार और लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री साम्पफेल ने कहा, “हम लेह में किसी भी पदयात्रा या विरोध प्रदर्शन के सख़्त ख़िलाफ़ हैं, क्योंकि उस समझौते के बाद औपचारिक बातचीत चल रही है जिस पर हमने आपसी सहमति से हस्ताक्षर किए थे। ऐसे समय में इस तरह की गतिविधियां हमारी सामूहिक बातचीत की ताक़त को कमज़ोर ही करेंगी। नई दिल्ली में MHA (केंद्रीय गृह मंत्रालय) के साथ हुई संतोषजनक छठी बैठक के नतीजों को सही अंजाम तक पहुँचाने के लिए ईमानदारी से आगे बढ़ने की ज़रूरत है।”

