राहुल गांधी ने कहा कि ‘समझौता कर चुके’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे ‘झुक रहे हैं’, क्योंकि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR नीति का विरोध करती रही हैं.
नई दिल्ली: राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा. यह हमला सरकार की उस राजपत्र अधिसूचना को लेकर था, जिसमें बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या RuPay डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट पर शुल्क नहीं लगाने का निर्देश दिया गया है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा कि इस कदम ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता “चुपचाप खोल दिया है”.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस नोटिफिकेशन को लेकर केंद्र पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि नियम को “यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं” से बदलकर “2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं” कर दिया गया है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “बहुत ज्यादा महंगाई ने पहले ही आम आदमी की जेब खाली कर दी है. थोक महंगाई करीब 10% है और बीजेपी सरकार जनता पर ‘Digital Payments Tax’ लगाने की योजना बना रही है. इसका मकसद उनकी बची-खुची थोड़ी सी बचत को भी खत्म करना है.”
14 सितंबर की तारीख वाले इस नोटिफिकेशन में यह साफ नहीं किया गया है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर व्यापारियों से शुल्क लिया जा सकता है या नहीं. इसमें खुद 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लगाने की बात नहीं कही गई है. अब तक यूपीआई लेनदेन की रकम कितनी भी हो, उस पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता रहा है.
गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अब 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर MDR लगाया जा सकता है. भले ही ऐसे लेनदेन कुल संख्या का सिर्फ 5% हों, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य में उनकी हिस्सेदारी करीब 65% है.”
गौरतलब है कि संसद ने मानसून सत्र के दौरान Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी थी. इसका मकसद यूपीआई और सरकार द्वारा अधिसूचित दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर MDR लगाने के लिए एक ढांचा तैयार करना था. विधेयक पास होने के बाद सरकार ने कहा था कि National Payments Corporation of India (NPCI) की अध्यक्षता वाली यूपीआई and Services Steering Committee MDR की दरें तय करेगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई पेमेंट मुफ्त रहेगा और कोई भी MDR दुकानदारों से लिया जाएगा, अंतिम यूजर्स से नहीं.
गांधी ने इस दावे पर सवाल उठाया और पूछा, “लेकिन दुकानदारों पर लगाए गए शुल्क का पैसा आखिर आएगा कहां से? कीमतों में जोड़कर, सीधे ग्राहक की जेब से.”
उन्होंने मोदी सरकार पर “एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने” का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR नीति का विरोध करती रही हैं. उन्होंने कहा, “अब मोदी सरकार ने नीति को बिल्कुल उसी दिशा में बदलने का रास्ता खोल दिया है.”
भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता से इसकी तुलना करते हुए गांधी ने कहा, “US Trade Deal की तरह, समझौता कर चुके पीएम मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं.”
खरगे ने भी केंद्र की कार्रवाई को “मोदी सरकार का सबसे बड़ा यू-टर्न” बताया. उन्होंने कहा कि जब नोटबंदी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे, तब सरकार ने कहा था कि इसे “डिजिटल पेमेंट और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने” के लिए किया गया था.
उन्होंने आगे कहा, “महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय, मोदी सरकार हर दिन उनकी जेब से पैसे निकालने का नया तरीका खोज रही है!!”
यूपीआई फिलहाल जीरो-MDR मॉडल पर चलता है. इसके तहत दुकानदारों से MDR नहीं लिया जाता और यूपीआई लेनदेन के लिए बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को भी ऐसी कोई फीस नहीं मिलती. प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर चर्चा के दौरान सरकार ने कहा था कि लेनदेन की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी के लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने में लगातार और बड़े निवेश की जरूरत है.

