शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ‘कॉनफिडेंशियल ऑपरेशंस (CONOPS) आर्किटेक्चर, अलग कमरों, एयर-गैप्ड सिस्टम और डिवाइस जमा करने की प्रक्रिया में पूरी तरह बदलाव’ का आदेश दिया है.
नई दिल्ली: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा तीन विषयों में यूजीसी-नेट परीक्षा के प्रश्नपत्रों में गलतियां मिलने के बाद परीक्षा रद्द किए जाने के एक दिन बाद, शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एजेंसी को सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का पूरी तरह ऑडिट करने और सुधार के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.
एजेंसी ने घोषणा की है कि वह अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के यूजीसी-नेट पेपर फिर से कराएगी क्योंकि प्रश्नपत्रों में कई गलतियां मिली थीं.
परीक्षा जून में हुई थी. छात्रों ने शुरुआत से ही यूजीसी-नेट परीक्षा के प्रश्नपत्रों में मिली गलतियों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन एनटीए ने रविवार को इन समस्याओं को माना और इन तीन विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दीं. अब ये परीक्षाएं 9 और 10 सितंबर को दोबारा होंगी.
मंत्रालय के अनुसार, शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को मंत्रालय और एनटीए के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की.
मंत्रालय ने कहा, “मंत्री ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि तय परीक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन हो. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि कॉनफिडेंशियल ऑपरेशंस (CONOPS) आर्किटेक्चर, अलग कमरों, एयर-गैप्ड सिस्टम और डिवाइस जमा करने की प्रक्रिया में पूरी तरह बदलाव युद्ध स्तर पर लागू किया जाए.”
मंत्रालय ने आगे कहा, “एनटीए को सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का पूरी तरह ऑडिट करने और सुधार के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है.”
तीन विषयों में यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने का फैसला उस समय आया है, जब कुछ महीने पहले ही एनटीए को नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था. इस मामले में हुई गड़बड़ियों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था.
26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए एक हाई-पावर टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी. इसकी अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक और पूर्व चेयरपर्सन नंदन नीलेकणि कर रहे हैं.
तीन विषयों में यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द किए जाने की विपक्ष ने भी काफी आलोचना की है. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “गलती एनटीए करता है, लेकिन सज़ा छात्र भुगतता है.”
गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मोदी जी, देखिए आपके एनटीए ने अभी क्या किया है. समाजशास्त्र, अंग्रेजी और कॉमर्स के यूजीसी-नेट एग्जाम 22 से 30 जून के बीच हुए थे. करीब दो महीने बाद एनटीए ने तीनों परीक्षाएं रद्द कर दीं क्योंकि उसने गलत प्रश्नपत्र बनाए और पुराने सवाल दोहरा दिए.”
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे.
कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई और वामपंथी संगठनों से जुड़े कई छात्र संगठनों, जिनमें एसएफआई भी शामिल है, ने दिल्ली में एनटीए कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया.
आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने भी एनटीए की आलोचना की. एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने एक बयान में कहा, “यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियां बेहद चिंताजनक हैं. एनटीए की गलतियों की कीमत छात्रों को नहीं चुकानी चाहिए. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए…”

