Close Menu
Jodhpur HeraldJodhpur Herald
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • ट्रेंडिंग न्यूज
    • राजनीति
    • कारोबार
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • शिक्षा/करियर
    • राजस्थान के जिले
      • अजमेर
      • अलवर
      • उदयपुर
      • कोटा
      • चित्तौड़गढ़
      • चुरु
      • जयपुर
      • जालौर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
      • झालावाड़
      • झुंझुनू
      • टोंक
      • डूंगरपुर
      • दौसा
      • धौलपुर
      • नागौर
      • पाली
      • प्रतापगढ़
      • बाड़मेर
      • बाराँ
      • बांसवाड़ा
      • बीकानेर
      • बूंदी
      • भरतपुर
      • भीलवाड़ा
      • राजसमंद
      • श्रीगंगानगर
      • सवाई माधोपुर
      • सिरोही
      • सीकर
      • हनुमानगढ़
    • संपादकीय
    What's Hot

    रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 20 घायल, अस्पताल पहुंचकर शेखावत ने जाना हाल

    September 8, 2026

    RBI की NRI डिपॉजिट स्कीम की सफलता से नकदी की समस्या पैदा हो रही है

    September 8, 2026

    हादसे के बाद जागने वाली व्यवस्था, सवाल सिर्फ मौतों का नहीं, जवाबदेही का भी

    September 8, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, September 8
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Jodhpur HeraldJodhpur Herald
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • ट्रेंडिंग न्यूज
    • राजनीति
    • कारोबार
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • शिक्षा/करियर
    • राजस्थान के जिले
      1. अजमेर
      2. अलवर
      3. उदयपुर
      4. कोटा
      5. चित्तौड़गढ़
      6. चुरु
      7. जयपुर
      8. जालौर
      9. जैसलमेर
      10. जोधपुर
      11. झालावाड़
      12. झुंझुनू
      13. टोंक
      14. डूंगरपुर
      15. दौसा
      16. धौलपुर
      17. नागौर
      18. पाली
      19. प्रतापगढ़
      20. बाड़मेर
      21. बाराँ
      22. बांसवाड़ा
      23. बीकानेर
      24. बूंदी
      25. भरतपुर
      26. भीलवाड़ा
      27. राजसमंद
      28. श्रीगंगानगर
      29. सवाई माधोपुर
      30. सिरोही
      31. सीकर
      32. हनुमानगढ़
      Featured

      रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 20 घायल, अस्पताल पहुंचकर शेखावत ने जाना हाल

      September 8, 2026
      Recent

      रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 20 घायल, अस्पताल पहुंचकर शेखावत ने जाना हाल

      September 8, 2026

      RAS प्रियंका-विश्नोई की मौत मामले में वसुंधरा हॉस्पिटल पर नई FIR

      August 6, 2026

      PM बोले- भारत सबसे बड़े ऊर्जा संकट से उबरा:, राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया

      July 4, 2026
    • संपादकीय
    Jodhpur HeraldJodhpur Herald

    नीतियों में यू-टर्न को कब माना जाए जायज?

    Jodhpur HeraldBy Jodhpur HeraldSeptember 8, 2026

    जमीनी साक्ष्यों के आधार पर नीतियों में बदलाव लचीलेपन और सीखने की क्षमता का प्रतीक है, लेकिन राजनीतिक दबाव और आधी-अधूरी तैयारी से लिए गए यू-टर्न नीतिगत विश्वसनीयता को चोट पहुंचाते हैं।

    अजीत रानाडे

    Published: 07 Sep 2026, 8:00 AM

    Follow us on:

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में आर्थिक नीति-निर्माण को लेकर आंखें खोलने वाला सबक दिया है। 5 अगस्त को जब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा से पूछा गया कि क्या अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए बनाई गई विशेष एफसीएनआर (बी) योजना को इसकी तय समय-सीमा 30 सितंबर से पहले बंद किया जा सकता है, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन महज नौ दिन बाद, आरबीआई ने इसकी अंतिम तारीख 31 अगस्त कर दी।

    इस अचानक बदलाव के पीछे वैध आर्थिक कारण हो सकते हैं। यह योजना उम्मीद से कहीं अधिक सफल रही थी। डॉलर का प्रवाह मजबूत था, जबकि रुपये के अवमूल्यन के खिलाफ तय सुरक्षा देने की सब्सिडी लागत बढ़ रही थी। इसके अलावा नकदी प्रबंधन और भविष्य की विदेशी मुद्रा देनदारियों का बढ़ता सिरदर्द भी सामने था। सवाल यह नहीं है कि आरबीआई को रुख बदलने का अधिकार है या नहीं, बल्कि यह है कि जब समय से पहले स्कीम को बंद करने की संभावना पर पहले से चर्चा चल रही थी, तो इसके ठीक उलट स्पष्ट आश्वासन क्यों दिया?

    आर्थिक नीतियां यू-टर्न से भरी पड़ी हैं। इनमें से कुछ बदलाव नीतिगत लचीलेपन और सीखने की क्षमता को दिखाते हैं, जबकि अन्य खराब तैयारी, राजनीतिक दबाव या नीतिगत अनिश्चितता को। आखिर, दोनों का अंतर कैसे समझें?

    डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति इसका ज्वलंत उदाहरण है। अप्रैल 2025 के ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ घोषणाओं के बाद शुल्क लगाए गए, स्थगित किए गए, संशोधित किए गए, घटाए गए, दोबारा धमकियां दी गईं और फिर से थोप दिए गए। सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों को आज के टैरिफ के साथ-साथ छह महीने बाद के टैरिफ नियमों की अनिश्चितता से भी जूझना पड़ता है।

    भारत के पास भी नीतियों से पीछे हटने के अपने उदाहरण हैं। उदाहरण के लिए, तीन कृषि कानून- जिन्हें बेहद मजबूती के साथ लागू किया गया, लेकिन किसानों के कड़े विरोध के बाद वापस ले लिया गया। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम-जिसे ई-20 को डिफॉल्ट बनाने की जल्दबाजी में आगे बढ़ाया गया और फिर वाहनों पर इसके प्रतिकूल प्रभावों के बढ़ते साक्ष्यों तथा अन्य चिंताओं के सामने आने पर कदम पीछे खींचने पड़े।

    या फिर पेंशन सुधारों को ही ले लीजिए। नई पेंशन योजना ने सरकारी पेंशन को बिना फंड वाले तय-लाभ के वादे से हटाकर फंड-आधारित और अंशदान-आधारित प्रणाली में बदल दिया। इसके बाद पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली के लिए बने राजनीतिक दबाव ने एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को जन्म दिया, जिसने अंशदान को बनाए रखते हुए निश्चित पेंशन का प्रावधान फिर बहाल किया। इसके बावजूद मार्च 2026 तक, पात्र 24.14 लाख केंद्रीय कर्मचारियों में से केवल 1.24 लाख कर्मचारियों ने यूपीएस का विकल्प चुना था।

    ये सभी नीतिगत बदलाव एक जैसे नहीं: कभी राजनीति बदलती है, कभी जमीनी साक्ष्य बदलते हैं, तो कभी मूल नीति पर पहले से समग्रता से विचार ही नहीं किया गया होता है। कभी-कभी तो नीतिगत सवाल ही गलत तरीके से तय किया जाता है।

    इसपर विचार कीजिए: ‘क्या औद्योगिक नीति काम करती है?’ इसका सार्वभौमिक ‘हां’ या ‘ना’ में उत्तर नहीं हो सकता। किस उद्योग के लिए? किस नीतिगत साधन के साथ? कितने समय के लिए? किस प्रशासनिक व्यवस्था के तहत? क्या सहायता प्रदर्शन पर आधारित है? क्या वहां स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है या पहले से जमे खिलाड़ियों को संरक्षण दिया जा रहा है? क्या भारत की उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना हर लिहाज से अच्छी नीति है?

    अर्थशास्त्र नीतिगत सवालों के एकदम अचूक उत्तर नहीं दे सकता क्योंकि आर्थिक व्यवहार तय मापदंडों से संचालित नहीं होता। एक नीति व्यवहार को बदलती है और बदला हुआ व्यवहार उस परिवेश को बदल देता है जिसमें वह नीति काम करती है। कृषि सुधार प्रोत्साहन बदलते हैं, लेकिन साथ ही राजनीतिक लामबंदी को भी जन्म देते हैं। उत्पादन सब्सिडी किसी उद्योग को खड़ा कर सकती है, लेकिन वही उद्योग बाद में एक ऐसा हित समूह बन जाता है जो सब्सिडी जारी रखने की लॉबिंग करने लगता है। राजनीतिक अर्थव्यवस्था कोई बाहरी व्यवधान नहीं; यह पूरी व्यवस्था का ही हिस्सा है। यहां तक कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को भी यह सबक सीखना पड़ा है।

    1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के दौरान, थाईलैंड, इंडोनेशिया और कोरिया में आईएमएफ समर्थित कार्यक्रमों ने शुरू में व्यापक संरचनात्मक सुधारों के साथ सख्त मैक्रोइकॉनॉमिक नीतियों पर जोर दिया। मलेशिया आईएमएफ के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। उसने पूंजी नियंत्रण लागू किया, अपनी मुद्रा रिंगित को डॉलर के साथ स्थिर किया और इसके बाद एक मजबूत आर्थिक सुधार दर्ज किया। क्या आईएमएफ की नीति गलत थी? मलेशिया उस दौर में पूंजी नियंत्रण के प्रति आईएमएफ के पारंपरिक कड़े रुख के बरक्स बड़ा जवाबी उदाहरण बनकर उभरा।

    2011 के यूरोजोन संप्रभु ऋण संकट ने एक और असहज स्थिति पैदा की। ग्रीस के कर्ज को पूरी तरह असहनीय माना गया। लेकिन आईएमएफ ने अपने असाधारण-पहुंच वाले नियमों को ही बदल दिया। उसने ग्रीस पर तुरंत कर्ज पुनर्गठन का दबाव नहीं बनाया, बल्कि उसे उदार वित्तीय सहायता दी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यूरोपीय संस्थान और सरकारें ग्रीस के कर्ज पुनर्गठन के खिलाफ थीं। 1997 में एशियाई देशों के प्रति सख्ती के मुकाबले यह दोहरा रवैया साफ दिखा और आईएमएफ पर पक्षपात के आरोप लगे। या फिर यह राजकोषीय सख्ती को लेकर आई नई समझ के चलते लिया गया नीतिगत यू-टर्न था?

    विश्व बैंक इसका और भी बड़ा उदाहरण रखता है। 1993 की उसकी प्रभावशाली ‘ईस्ट एशियन मिरेकल’ रिपोर्ट का निचोड़ था कि विशिष्ट उद्योगों को बढ़ावा देना अमूमन काम नहीं करता। उस समय इसने वाशिंगटन सहमति को मजबूत करने में मदद की, जिसमें कहा गया था कि सरकार-नेतृत्व वाले औद्योगिक नियोजन के बजाय बाजार-अनुकूल नीतियां सही रास्ता हैं। तीन दशक बाद, इसकी 2026 की रिपोर्ट कहती है कि औद्योगिक नीति की वापसी हो चुकी है और यह सरकारों को इसके उपयोग के लिए साक्ष्य-आधारित टूलकिट प्रदान करती है। यह भारत की पीएलआई योजना के लिए अच्छी खबर है, लेकिन क्या यह यू-टर्न नहीं?

    वर्षों तक विश्व बैंक अपनी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग प्रकाशित करता रहा, जिसने किसी देश की व्यापार-अनुकूल छवि को तय करने में बड़ी भूमिका हासिल कर ली। विडंबना यह थी कि ‘डूइंग बिजनेस 2010’ में 183 देशों में भारत 133वें, ब्राजील 129वें और रूस 120वें स्थान पर था; जबकि चीन 89वें पायदान पर था। स्पष्ट रूप से विश्व बैंक के संकेतक यह समझाने में पूरी तरह नाकाम रहे कि इतनी खराब रैंकिंग वाले ये ब्रिक्स देश इतनी तेजी से विकास कैसे कर रहे थे। इसके बाद, एक विवाद के चलते विश्व बैंक ने 2021 में डूइंग बिजनेस रैंकिंग को बंद कर दिया और इसकी जगह एक नया पैमाना लाया गया।

    इन सब बातों का कतई यह मतलब नहीं कि अर्थशास्त्री या नीति-निर्माता अपनी राय नहीं बदल सकते या उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। विपरीत साक्ष्यों के सामने आने पर भी अपनी पुरानी बात पर अड़े रहना निरंतरता नहीं, हठधर्मिता और दुराग्रह है। समस्या तब पैदा होती है जब संस्थान जमीनी आर्थिक वास्तविकताओं से अधिक निश्चितता का दावा करते हैं, या जब राजनीतिक मजबूरी में बदले गए फैसलों को आर्थिक अनिवार्यता बताकर पेश किया जाता है।

    आरबीआई स्पष्ट कह सकता था कि एफसीएनआर (बी) की खिड़की 30 सितंबर तक या विदेशी मुद्रा प्रवाह के एक निश्चित स्तर को पार करने तक अथवा वित्तीय स्थिरता की चिंताएं पैदा होने तक ही खुली रहेगी। इस घटनाक्रम की एक तीखी समीक्षा में ठीक यही बात कही गई है: पहले से तय ट्रिगर नियमों की मदद से नीतियों की स्थिरता और भरोसे को खोए बिना जरूरी लचीलापन बरकरार रखा जा सकता था।

    बेहतर नीति-निर्माण के लिए विनम्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ निर्णायकता की भी जरूरत होती है। विनम्रता का अर्थ यह स्वीकार करना है कि अनुमान और मॉडल गलत हो सकते हैं। पारदर्शिता का अर्थ यह समझाना है कि फैसले में क्या बदलाव आया। जवाबदेही का अर्थ यह स्वीकार करना है कि नीति पलटने के क्या परिणाम होंगे। और निर्णायकता का अर्थ यह है कि अनिश्चितता कभी नीतिगत शिथिलता का बहाना नहीं बननी चाहिए।

    यू-टर्न हमेशा कमजोरी की निशानी नहीं होते। कभी-कभी वे यह दर्शाते हैं कि नीतियां तेजी से सीख रही हैं और समयानुकूल हैं। लेकिन साक्ष्य बदलने के कारण दिशा बदलने और राजनीतिक हवा बदलने के कारण दिशा बदलने में बहुत बड़ा फर्क होता है। संस्थाएं कभी गलत न होने का दिखावा करके साख नहीं बचातीं, बल्कि यह समझाकर विश्वसनीयता कायम रखती हैं कि उन्होंने अपनी राय क्यों बदली, जमीन पर क्या बदला है और नए रास्ते पर अधिक भरोसा क्यों किया जाना चाहिए।

    (अजीत रानाडे जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। साभार: द बिलियन प्रेस)

    Post Views: 4

    Related Posts

    RBI की NRI डिपॉजिट स्कीम की सफलता से नकदी की समस्या पैदा हो रही है

    September 8, 2026

    हादसे के बाद जागने वाली व्यवस्था, सवाल सिर्फ मौतों का नहीं, जवाबदेही का भी

    September 8, 2026

    20% एथेनॉल, 80% गुस्सा: पेट्रोल की मिलावट से नाराज़ भाजपा का वफादार वोट बैंक जवाब की तलाश में

    September 5, 2026

    ‘BJP-RSS दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते’, राहुल गांधी ने दलितों पर अत्याचार, ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सरकार को घेरा

    August 29, 2026

    नेपाल त्रासदी अपडेट: अब तक 616 लोगों की मौत, करीब 2500 लापता, 2301 बचाए गए, चितवन में सबसे ज्यादा मौतें

    August 29, 2026

    नेपाल बाढ़ में 105 भारतीय पर्यटक लापता, 31 तीर्थयात्री मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे, अबतक 8 की मौत

    August 26, 2026
    -advertisement-
    Top Posts

    पाली के देसूरी नाल हादसे में तीन स्कूली बच्चियों की मौत

    December 9, 202428 Views

    पूजा स्थल अधिनियम को दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी। इसे दोबारा क्यों देखें?

    December 5, 2024104 Views

    ‘1.5 करोड़ पेड़ काट दिए गए, ताकि एक बिजनेसमैन…’, ग्रेट निकोबार को लेकर मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

    June 5, 202617 Views
    -advertisement-
    Stay In Touch
    • Facebook
    • YouTube
    • Twitter
    • Instagram
    Recent News

    रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 20 घायल, अस्पताल पहुंचकर शेखावत ने जाना हाल

    September 8, 2026

    RBI की NRI डिपॉजिट स्कीम की सफलता से नकदी की समस्या पैदा हो रही है

    September 8, 2026

    हादसे के बाद जागने वाली व्यवस्था, सवाल सिर्फ मौतों का नहीं, जवाबदेही का भी

    September 8, 2026
    Most Popular

    पाली के देसूरी नाल हादसे में तीन स्कूली बच्चियों की मौत

    December 9, 202428 Views

    पूजा स्थल अधिनियम को दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी। इसे दोबारा क्यों देखें?

    December 5, 2024104 Views

    ‘1.5 करोड़ पेड़ काट दिए गए, ताकि एक बिजनेसमैन…’, ग्रेट निकोबार को लेकर मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

    June 5, 202617 Views
    Contact Us

    CHIEF EDITOR
    Hanuman Mandar

    ADDRESS
    Office No. 4 Opp. Jai Hind Bal Mandir School Jalori Gate Jodhpur 342001, Rajasthan

    CONTACT NO.
    0291-2640948

    EMAIL
    jodhpurherald@gmail.com

    WEB ADDRESS
    www.jodhpurherald.com

    © 2026 www.jodhpurherald.com. Designed by www.WizInfotech.com.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.