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    विष्णु नागर का व्यंग्यः प्रधानमंत्री सचमुच ‘करुणावतार’ हैं, गर्मी में खूब पानी पीने की सलाह कोई ऐसे नहीं देता!

    Jodhpur HeraldBy Jodhpur HeraldMay 31, 2026

    प्रधानमंत्री सबकुछ सह सकते हैं मगर अपना और डोनाल्ड ट्रंप का अपमान नहीं! हो सकता है कि इस अपराध में मंत्रिमंडल के अगले फेरबदल में उस मंत्री को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए, इसलिए प्यासे मंत्री भी जड़वत बैठे रहे और पानी की बोतल की तरफ से नजरें हटा ली।

    विष्णु नागर

    Published: 31 May 2026, 7:59 AM

    प्रधानमंत्री सचमुच ‘करुणावतार’ हैं। देश को आजाद हुए 78 साल हो चुके हैं, मगर आज तक किसी और प्रधानमंत्री ने भीषण गर्मी के दिनों में अपने मंत्रियों को यह ‘करुणासिक्त’ सलाह नहीं दी कि वे खूब पानी पिया करें। प्यास न लगे तो भी पानी पियें। शरीर में पानी की कमी न होने दें!

    वे जानते हैं कि उनके मंत्री बेहद अनुशासित और आज्ञाकारी हैं। जब तक उन्हें स्पष्ट निर्देश और आदेश नहीं दिया जाएगा, वे भीषण गर्मी हो या उसका बाप, स्वेच्छा से खूब पानी नहीं पियेंगे। उतना ही पानी पियेंगे, उतना ही खाएंगे जितने के लिखित निर्देश उन्हें दिये गए हैं। अतः यह आवश्यक हो गया था कि प्रधानमंत्री बैठक बुलाकर उन्हें आदेशित करते वरना उनके कुछ मंत्री तो नाम के इतने भूखे हैं कि टीवी चैनलों के प्राइम टाइम में नाम कमाने और अखबारों की लीड खबर बनने के लिए कम पानी पीकर जान दे सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इस खतरे को अपनी ‘दूरदर्शिता’ से टाल दिया और उनकी शहादत की आकांक्षा में पलीता लगा दिया!

    कुछ मंत्रियों ने तो बैठक में समय से आधा घंटा पहले पहुंचने के लिए अपनी बीवी के इस अनुरोध को ठुकरा दिया था कि इतनी गर्मी में जा रहे हो तो थोड़ा सा ठंडा पानी पी लो! उन्होंने पत्नी को झिड़क दिया। कहा कि तू इधर पानी-पानी करती रहेगी और उधर तेरे हसबैंड की कुर्सी नीचे से खिसक जाएगी। तू जानती नहीं इन प्रधानमंत्री को! ये कोई मनमोहन सिंह टाइप नहीं हैं, जो माफ कर दें! फिर तू पीती रहना पानी और मुझे पिलाती रहना। फिर कोई और काम तो रहेगा नहीं! पानी पीओ और निकालो। पीओ और  निकालो। आया कुछ भेजे में? सॉरी, भेजा तो तुम्हारे पास है नहीं!

    हजार बार कहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर मुझे टोका मत करो मगर मां-बाप ने अच्छे संस्कार दिये हों, तभी तो उनका असर हो! पता नहीं इसे मेरे मत्थे क्यों मढ़ दिया मेरे मां-बाप ने। कोई और नहीं मिली थी उन्हें। एक मंत्री ने इतना सब कहने के बाद पत्नी पर दया दिखाई और कहा कि अच्छा जा जब तूने टोक ही दिया है तो एक गिलास में पानी पिला ही दे! जल्दी कर, खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या ताक रही है, जा!

    कुछ मंत्री बिना पानी पिये ही चले गए। अब प्रधानमंत्री निवास में बैठे-बैठे पछता रहे थे क्योंकि वहां बैठक आरंभ होने से पहले उन्हें पानी के लिए पूछने वाला कोई नहीं था। किसी में इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि प्रधानमंत्री निवास के किसी कर्मचारी से पानी मांग सके!

    खैर बैठक शुरू हुई तो सबकी मेज के आगे पानी की एक-एक ठंडी बोतल रख दी गई थी मगर किसी में इतना साहस नहीं था कि उसका ढक्कन खोलकर पानी पीने लगे क्योंकि प्रधानमंत्री उस समय वचनामृतों का पान करवाने लगे थे, अमृत मंत्र दे रहे थे। उनके वचन भीषण गर्मी में पानी पीने के बारे में थे! उनका श्रवण न करके पानी की बोतल की तरफ लालची निगाहें दौड़ाने को प्रधानमंत्री के अपमान के रूप में देखा जा सकता था।

    प्रधानमंत्री सबकुछ सह सकते हैं मगर अपना और डोनाल्ड ट्रंप का अपमान नहीं! हो सकता है कि इस अपराध में मंत्रिमंडल के अगले फेरबदल में उस मंत्री को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए, इसलिए प्यासे मंत्री भी जड़वत बैठे रहे! कुछ ने तो पानी की बोतल को दृष्टिपथ से इतना दूर कर दिया कि प्रधानमंत्री और उनके बीच वह बाधा न बने। भूल से भी उसकी ओर निगाह न जाए!

    सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने अपने मंत्रालय की जल शक्ति का अहसास करवाने के लिए सामने रखी बोतल की तरफ हाथ बढ़ाने की झिझक भरी कोशिश की। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने फौरन इसे ताड़ लिया कि यह प्रधानमंत्री के आदेश-निर्देश के पालन में अव्वल आना चाहता है तो उन्होंने फटाफट अपनी बोतल‌ खोली और गट-गट पूरा पानी पी लिया।

    प्रधानमंत्री उनकी तरफ देखकर मुस्कुराए तो बाकी मंत्रियों का भी हौसला बढ़ा। उन्होंने भी एक ही सांस में पानी पीने का प्रयास किया। उन मंत्रियों ने भी जिन्हें प्रोस्टेट की भयंकर शिकायत है और जिन्हें पानी पीने के आधे घंटे बाद ज़ोर की सू-सू आने लगती है! वक्त की नज़ाकत देखते हुए इस खतरे का सामना करना उनके लिए आवश्यक हो गया था!

    केवल अमित शाह ऐसे मंत्री थे, जिन्होंने केवल एक घूंट पानी पिया और सबके सामने यह जता दिया कि उनका प्रधानमंत्री से एक अलग ही संबंध है और उन्हें सारा पानी पीकर यह जताने की जरूरत नहीं कि वे उनके सबसे वफादार मंत्री हैं! इस बीच राजनाथ सिंह समेत सभी मंत्री बोतल खाली कर चुके थे और उसे उन्होंने मेज पर इतनी जोर से पटका था कि प्रधानमंत्री तक उसकी गूंज पहुंचे मगर प्रधानमंत्री ने इस पर ध्यान देना उचित नहीं समझा!

    मंत्रिमंडल की बैठक का एक ही एजेंडा था कि भीषण गर्मी में मंत्री खूब पानी क्यों पीयें। इसका देश की अर्थव्यवस्था से क्या संबंध है। फॉरेन इन्वेस्टमेंट से क्या रिश्ता है? खैर यह हमेशा की तरह एजेंडा सर्वसम्मति से भी कुछ अधिक से पास हो गया। अनेक मंत्रियों ने इसके समर्थन में अपने दोनों हाथ उठाए थे।

    इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारामनण ने प्रधानमंत्री के इस बहुमूल्य सुझाव की प्रशंसा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। सभी ने मेजें थपथपाकर इसका स्वागत किया। देखा गया कि इस बार जोर से और देर तक मेज थपथपाने में राजनाथ सिंह सबसे आगे थे। शिवराज सिंह को लगा कि रक्षामंत्री ने उन्हें मात दे दी है। प्रधानमंत्री से ‘अपनापन’ जताने का यह मौका उनसे षड़यंत्रपूर्वक छीन लिया है। उन्होंने राजनाथ जी की ओर टेढ़ी नजर से देखते हुए मन ही मन प्रतिज्ञा की कि आगे से वे इस आदमी से सतर्क रहेंगे और इसकी हर चाल को नाकामयाब करके प्रधानमंत्री से ‘अपनापन’ सिद्ध करेंगे!

    इस बीच एक कनिष्ठ मंत्री ने इस प्रस्ताव में महत्वपूर्ण संशोधन पेश करते हुए कहा कि मेरी विनम्र प्रार्थना है कि इसमें यह जोड़ा जाए कि संवेदनशील का दावा करने वाले जवाहर लाल नेहरू ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कभी ऐसी नेक सलाह अपने मंत्रियों को नहीं दी, जिसका कुपरिणाम आज देश देख रहा है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस संशोधन का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें इंदिरा गांधी, राजीव गांधी को भी अच्छी तरह लपेटा जाना चाहिए। इसी क्रम में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की भी ऐसी मजम्मत की जानी चाहिए कि छह महीने तक ये सिर न उठा सकें, आंखें न दिखा सकें!

    प्रधानमंत्री ने इस सुझाव पर बहुत जोर से मेज थपथपाई। उनके थक जाने के बाद भी मेजों की थपथपाहट काफी देर तक जारी रही। इसी बीच प्रधानमंत्री ‘जयश्री राम’ के उद्घोष के बीच मीटिंग से उठकर जाने लगे। इसके बाद वरिष्ठता क्रम में एक-एक मंत्री कक्ष से बाहर निकलने के लिए लाइन बनाने लगे। इसमें फिर दो सिंहों की टकराहट हुई। शिवराज सिंह. अमित शाह के साथ जाकर खड़े हो गए ताकि राजनाथ सिंह आगे न निकल सकें मगर रक्षामंत्री ने कृषि मंत्री की बांह खींच कर उन्हें अपने से पीछे कर उनकी असली जगह दिखा दी। वह खुद अमित शाह के पीछे जाकर खड़े हो गए, जबकि मंत्रिमंडलीय वरिष्ठता क्रम में उन्हें सबसे आगे खड़ा होना चाहिए था!

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