‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने पत्र में कहा कि जब अन्य सभी संस्थागत व्यवस्थाएं विफल हो जाती हैं तो लोग न्यायपालिका में अंतिम भरोसा रखते हैं।
विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को पत्र लिखकर देश का लोकतंत्र ‘‘खतरे में’’ होने का दावा किया और चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जब सभी संस्थागत तंत्र विफल हो जाते हैं तो नागरिकों की अंतिम उम्मीद न्यायपालिका ही होती है।
बीते 28 जून को विपक्ष के 23 दलों के नेताओं ने यह पत्र लिखा था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई अन्य नेताओं ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में इन नेताओं ने कहा कि वे सामान्य परिस्थितियों में न्यायपालिका को इस प्रकार का पत्र नहीं लिखते, लेकिन उन्हें लगता है कि ‘‘देश का लोकतंत्र खतरे में है’’ और इसलिए उन्होंने यह असाधारण कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि संसद, न्यायपालिका, मीडिया और कार्यपालिका लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभ हैं तथा इन संस्थाओं के बीच सहयोगात्मक व्यवस्था से ही लोकतंत्र मजबूत रह सकता है। उन्होंने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद बताते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी जनता की असली इच्छा को प्रभावित कर सकती है।
पत्र में निर्वाचन आयोग और विशेष रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कराई जा रही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
पत्र में दावा किया गया है कि दस्तावेज आधारित सत्यापन प्रक्रिया गरीबों, अशिक्षितों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और प्रवासी श्रमिकों के लिए ‘‘बहिष्कार वाली ’’ साबित हुई।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक भ्रम, पारदर्शिता की कमी और नियमों में बार-बार बदलाव जैसी समस्याएं सामने आईं।
चुनावों में हेराफेरी, इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) के पक्षपाती व्यवहार और विपक्षी पार्टियों के खिलाफ सेंट्रल जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए, इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत को भेजे एक जॉइंट मेमोरेंडम में कहा कि वे CJI से संपर्क करने का अनोखा कदम उठा रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि “लोकतंत्र खतरे में है”।
28 जून की तारीख वाला यह लेटर विपक्ष ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को मीडिया को जारी किया। इंडिपेंडेंट MP कपिल सिब्बल समेत 24 विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साइन वाले इस लेटर में पश्चिम बंगाल और बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चिंताओं के बारे में डिटेल में बताया गया है। नेताओं ने सीधा आरोप भी लगाया कि उनका मानना है कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में हाल ही में हुए चुनावों में “हेराफेरी” की गई थी। नेताओं ने कहा कि वे कोर्ट इसलिए जा रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि डेमोक्रेटिक संस्थाएं दबाव में हैं और कई मामलों में चुनावी नतीजे लोगों की इच्छा को सही ढंग से नहीं दिखाते हैं।
उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी लंबित मामले को प्रभावित करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करना है।
पत्र के अंत में नेताओं ने कहा कि यदि न्यायपालिका भी लोगों की चिंताओं का समाधान करने में विफल रहती है, तो यह प्रश्न खड़ा होता है कि नागरिक आखिर किस संस्था की ओर देखें।
पीटीआई के इनपुट के साथ

