Close Menu
Jodhpur HeraldJodhpur Herald
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • ट्रेंडिंग न्यूज
    • राजनीति
    • कारोबार
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • शिक्षा/करियर
    • राजस्थान के जिले
      • अजमेर
      • अलवर
      • उदयपुर
      • कोटा
      • चित्तौड़गढ़
      • चुरु
      • जयपुर
      • जालौर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
      • झालावाड़
      • झुंझुनू
      • टोंक
      • डूंगरपुर
      • दौसा
      • धौलपुर
      • नागौर
      • पाली
      • प्रतापगढ़
      • बाड़मेर
      • बाराँ
      • बांसवाड़ा
      • बीकानेर
      • बूंदी
      • भरतपुर
      • भीलवाड़ा
      • राजसमंद
      • श्रीगंगानगर
      • सवाई माधोपुर
      • सिरोही
      • सीकर
      • हनुमानगढ़
    • संपादकीय
    What's Hot

    प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग दिखाती है कि भीड़ नियंत्रण की नीति अब भी ब्रिटिश दौर जैसी है

    July 30, 2026

    पैलेट गन: सुप्रीम कोर्ट ने ‘असाधारण स्थितियों’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि RAF के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

    July 30, 2026

    ‘निर्वाचित तानाशाही’ की अभेद्य दीवार में छेद, युवाओं ने दिखाया रास्ता

    July 30, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, July 30
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Jodhpur HeraldJodhpur Herald
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • ट्रेंडिंग न्यूज
    • राजनीति
    • कारोबार
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • शिक्षा/करियर
    • राजस्थान के जिले
      1. अजमेर
      2. अलवर
      3. उदयपुर
      4. कोटा
      5. चित्तौड़गढ़
      6. चुरु
      7. जयपुर
      8. जालौर
      9. जैसलमेर
      10. जोधपुर
      11. झालावाड़
      12. झुंझुनू
      13. टोंक
      14. डूंगरपुर
      15. दौसा
      16. धौलपुर
      17. नागौर
      18. पाली
      19. प्रतापगढ़
      20. बाड़मेर
      21. बाराँ
      22. बांसवाड़ा
      23. बीकानेर
      24. बूंदी
      25. भरतपुर
      26. भीलवाड़ा
      27. राजसमंद
      28. श्रीगंगानगर
      29. सवाई माधोपुर
      30. सिरोही
      31. सीकर
      32. हनुमानगढ़
      Featured

      PM बोले- भारत सबसे बड़े ऊर्जा संकट से उबरा:, राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया

      July 4, 2026
      Recent

      PM बोले- भारत सबसे बड़े ऊर्जा संकट से उबरा:, राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन किया

      July 4, 2026

      मंडोर गार्डन में दर्दनाक हादसा: टॉय ट्रेन से गिरी 5 साल की मासूम, मौत

      June 2, 2026

      जोधपुर में आंधी-तूफान का कहर: 12 हजार बिजली पोल धराशायी, 1100 से अधिक गांवों में अंधेरा

      June 2, 2026
    • संपादकीय
    Jodhpur HeraldJodhpur Herald

    प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग दिखाती है कि भीड़ नियंत्रण की नीति अब भी ब्रिटिश दौर जैसी है

    Jodhpur HeraldBy Jodhpur HeraldJuly 30, 2026

    इस बात पर लंबे समय से लंबित बहस शुरू हो गई है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ बल प्रयोग करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए कब उचित है और किन हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति होनी चाहिए.

    नई दिल्ली: किस्सा ख्वानी बाजार के एंट्री गेट पर 50 हॉर्सपावर वाली विकर्स-क्रॉसली M25 बख्तरबंद गाड़ियों के पीछे अपनी मशीनगनें ताने रॉयल गढ़वाल राइफल्स के सैनिक अप्रैल की तपती धूप में खड़े थे. सड़क के दोनों ओर व्यापारियों के घरों की बालकनियों से उन पर लगातार गालियां और इंसानी मल फेंका जा रहा था, लेकिन वे वहीं डटे रहे. 23 अप्रैल 1930, सेंट जॉर्ज डे के दिन, स्थानीय पुलिस पश्तून राष्ट्रवादी नेता खान अब्दुल गफ्फार खान को गिरफ्तार करने किस्सा ख्वानी बाजार पहुंची थी. खान के लाल कुर्ता पहने खुदाई खिदमतगार स्वयंसेवकों ने पुलिस का रास्ता रोक दिया और उनके ट्रकों के टायर काट दिए. आखिरकार, आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, “प्रभारी सब-इंस्पेक्टर को कैदियों के इस सुझाव को मानना पड़ा कि वे ट्रक से उतरकर भीड़ की सुरक्षा में जेल तक जाएंगे.”

    लेकिन प्रदर्शनकारियों का बाजार पर कब्जा बना रहा था और इसके बाद बख्तरबंद गाड़ियों को बुलाया गया. फिर कुल्हाड़ी के एक वार से प्राइवेट हेरोल्ड ब्रायंट की मौत हो गई और एक बख्तरबंद गाड़ी में आग लग गई. साफ आदेश न मिलने पर कैप्टन एस. जे. किंग ने अपनी मशीनगनों से फायरिंग करने का आदेश दे दिया. किंग्स ओन यॉर्कशायर लाइट इन्फैंट्री के एक अधिकारी ने लिखा, “मुख्य सड़क पर करीब 1500 लोगों की भीड़ थी. वह जादू की तरह गायब हो गई और जमीन पर कई लाशें छोड़ गई.”

    पिछले हफ्ते, जब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने दिल्ली में छात्रों के खिलाफ बर्डशॉट से भरी पंप-एक्शन शॉटगन और बिजली वाले कैटल प्रोड का इस्तेमाल किया, तब आखिरकार इस बात पर बहस शुरू हुई कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कब बल का इस्तेमाल कर सकती है और किन हथियारों की अनुमति होनी चाहिए.

    भारत में पुलिसिंग का रिकॉर्ड काफी खराब रहा है. दिप्रिंट को मिले गोपनीय पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, कश्मीर में 2010 में पुलिस फायरिंग में 117 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी. 2016 में 85 और 2018 में 59 लोग मारे गए. स्कीट शूटिंग जैसे खेलों में इस्तेमाल होने वाली कम घातक बर्डशॉट शॉटगन 2016 से कश्मीर में इस उम्मीद के साथ लाई गई थी कि मौतों की संख्या कम होगी, लेकिन इसके कारण सैकड़ों युवाओं की आंखों की रोशनी चली गई.

    पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने दिल्ली में घायल हुए दो लोगों के साथ मिलकर बर्डशॉट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. डॉक्टर भी लंबे समय से यही मांग करते रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कश्मीर में शॉटगन पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उस समय के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि दूसरी तकनीकें असरदार नहीं रहीं. अदालत को यह भी बताया गया था कि सरकार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए “एक गुप्त हथियार” पर काम कर रही है.

    लेकिन समस्या सिर्फ तकनीक की नहीं है. शॉटगन असली बीमारी नहीं, बल्कि उसका एक लक्षण है. भारत के ज्यादातर पुलिस बल आज भी भीड़ नियंत्रण के लिए वही तरीके अपनाते हैं, जिन्हें लगभग सौ साल पहले किस्सा ख्वानी बाजार में तैनात सैनिक भी पहचान लेते.

    राज और दंगा

    लाठियां कंधों पर राइफल की तरह रखे युवा हिंदू और मुस्लिम लाहौर की बादशाही मस्जिद के आसपास के मैदानों से निकल पड़े थे. वे खुशी-खुशी ऐलान कर रहे थे कि सम्राट किंग जॉर्ज पंचम की मौत हो गई है. यह समूह खुद को “डंडा फौज” कहता था. वे लाहौर किले तक पहुंचे, जहां उन्होंने पहरा दे रहे ब्रिटिश सैनिकों पर थूका और उन्हें “गोरे सूअर” कहा.

    इसके बाद डंडा फौज रेलवे स्टेशन पहुंची और वहां के कर्मचारियों से हड़ताल करने की अपील की. 12 अप्रैल 1919 तक, यानी जलियांवाला बाग की त्रासदी से ठीक पहले, लाहौर की दीवारों पर बड़ी संख्या में पोस्टर लगाए गए. इन पोस्टरों में गांधी के नाम पर पंजाब के लोगों से इस नई सेना में शामिल होने और अंग्रेजों को मारने की अपील की गई थी.

    आखिरकार, डंडा फौज का सामना वेश्याओं के इलाके हीरा मंडी में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस की एक टुकड़ी से हुआ. इस बार एक परिचित हथियार इस्तेमाल किया गया. पंप-एक्शन शॉटगन, जिसमें बकशॉट भरे गए थे.

    हिंसा की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में लिखा गया, “कमेटी की राय में इस बात से साफ था कि भीड़ से सीधे भिड़ने के लिए सर्विस गोलियों से लैस सेना की बजाय बकशॉट से लैस पुलिस को आगे किया गया. पुलिस ने बहुत कम गोलियां चलाईं और भीड़ को पहले चेतावनी भी दी. इससे साबित होता है कि सबसे ज्यादा सावधानी बरती गई और जितना जरूरी था, उससे ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया गया.”

    औपनिवेशिक शासकों के लिए डर पैदा करना ही व्यवस्था बनाए रखने का सबसे बड़ा हथियार था. मिस्र के शहरों में प्रदर्शनकारियों पर डंडों, लाठियों और भारी हथियारों से हमला किया जाता था. गांवों में बेडुइन लोगों के खिलाफ अक्सर लुईस मशीनगनों का इस्तेमाल किया जाता था और कई बार हवाई हमले भी किए जाते थे.

    भारत में भी यही रणनीति अपनाई गई. यहां भी आम लोगों के खिलाफ कई बार हवाई ताकत का इस्तेमाल हुआ. 1923 में उत्तर वजीरिस्तान के गांवों पर बमबारी में 50 लोगों और बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी. जलियांवाला बाग के बाद गुजरांवाला शहर पर रॉयल एयर फोर्स ने हवाई फायरिंग की थी. इतिहासकार सिमेओन शूल लिखते हैं कि 1920 में ब्रिटिश राज को बनाए रखने के लिए “घुड़सवार सेना की पांच रेजिमेंट, 21 ब्रिटिश इन्फैंट्री बटालियन, 15 सक्रिय और 32 प्रशिक्षण भारतीय इन्फैंट्री बटालियन, बख्तरबंद गाड़ियों की आठ टुकड़ियां और बड़ी संख्या में तोपखाना, इंजीनियर और पायनियर यूनिट्स आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थीं.”

    बल प्रयोग की सीमाएं

    औपनिवेशिक शासक जिस सबसे बड़ी बात को कभी नहीं समझ पाए, वह किस्साख्वानी में साफ दिखी. डर और दहशत से हालात नहीं संभलते. बाजार में भेजी गई बख्तरबंद गाड़ियों को भीड़ ने चारों तरफ से घेर लिया और रास्ता छोड़ने से इनकार कर दिया. पहली बख्तरबंद गाड़ी से उतरकर रास्ता साफ करने की कोशिश कर रहे ब्रायंट ने जब एक प्रदर्शनकारी पर बंदूक तानी, तो उसकी हत्या कर दी गई. इसके बाद पहली गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिससे पीछे आ रही दूसरी गाड़ी उससे टकरा गई. हादसे में रिस रहे ईंधन में आग लग गई. मशीनगनों से हुई फायरिंग में बड़ी संख्या में लोग मारे गए. सरकारी रिकॉर्ड में यह संख्या 20 बताई गई, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जांच में 125 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया गया. इसके बावजूद खुदाई खिदमतगारों ने अगले कई दिनों तक पेशावर पर अपना नियंत्रण बनाए रखा. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में ब्रिटिश राज का संघर्ष उसके अंत तक जारी रहा.

    आजादी के बाद के भारत ने भी इन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया. राजनीतिक वैज्ञानिक डेविड बेले ने 1971 में लिखा था कि भारत की पुलिस व्यवस्था अब भी “पूरी तरह औपनिवेशिक” बनी हुई है. इसमें लोगों के साथ संवाद करने और जनता के प्रति जवाबदेह बनने की बहुत कम इच्छा दिखती है. ज्यादातर मामलों में पुलिसिंग सिर्फ बल प्रयोग के जरिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रही. नई सदी के शुरुआती दशकों में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की घटनाएं लगातार बढ़ती गईं.

    शोधकर्ता सोनल मारवाह ने दिखाया है कि नई सदी में आम नागरिकों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल लगातार बढ़ा. 2007 में राजस्थान में बड़े पैमाने पर हुई जातीय हिंसा में कम से कम 37 लोगों की जान गई, जिनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी थे. इससे एक साल पहले भी 26 लोगों की मौत हुई थी. 2017 में पुलिस ने बलात्कार के दोषी करार दिए जाने के बाद हिंसा कर रहे गुरमीत राम रहीम सिंह के समर्थकों पर गोली चलाई, जिसमें 32 लोग मारे गए.

    दिल्ली से मिली सीख

    लगातार सरकारों ने पुलिस के जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग पर रोक लगाने का वादा किया, लेकिन इस मामले में गंभीरता की कमी साफ दिखती है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों पर भी भरोसा करना मुश्किल है. इस साल गर्मियों में जारी 2024 के NCRB आंकड़ों में दावा किया गया कि लाठीचार्ज और पुलिस फायरिंग में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई और सिर्फ दो लोग घायल हुए. जबकि उसी साल मणिपुर में भयानक जातीय हिंसा हुई, सांप्रदायिक हिंसा तेजी से बढ़ी और देशभर में किसानों के बड़े आंदोलन हुए. यह भी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है कि किन परिस्थितियों में घातक बल का इस्तेमाल किया गया और मौतों व चोटों को कैसे रोका जा सकता था.

    घातक बल का इस्तेमाल सिर्फ तभी होना चाहिए, जब किसी इंसान की जान पर तुरंत खतरा हो. इसके अलावा किसी भी स्थिति में इसका इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. 2011 में लंदन पुलिस ने भीड़ को कुछ जगहों पर आग लगाने और लूटपाट करने दी, क्योंकि उसे भरोसा था कि बाद में आरोपियों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है.

    सरकार को छात्र आंदोलनों से जो कई सबक सीखने चाहिए, उनमें सबसे अहम यही है कि भारतीयों के साथ नागरिकों की जगह प्रजा जैसा व्यवहार करना लंबे समय तक नहीं चल सकता. विरोध प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ संविधान में लिखा हुआ अधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के लोगों के रोजमर्रा के जीवन का भी हिस्सा होना चाहिए.

    प्रवीण स्वामी ‘दिप्रिंट’ में कंट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं. उनका X हैंडल @praveenswami है. विचार निजी हैं.

    Post Views: 5

    Related Posts

    पैलेट गन: सुप्रीम कोर्ट ने ‘असाधारण स्थितियों’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि RAF के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

    July 30, 2026

    ‘निर्वाचित तानाशाही’ की अभेद्य दीवार में छेद, युवाओं ने दिखाया रास्ता

    July 30, 2026

    संसद के मॉनसून सत्र के आठवें दिन की मुख्य बातें: लोकसभा में ध्वनि मत से पेपर लीक विरोधी बिल पास हुआ।

    July 29, 2026

    संसद LIVE: राहुल गांधी के इस बयान पर लोकसभा में हंगामा कि अमित शाह ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।

    July 29, 2026

    सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को बंद कर दिया।

    July 29, 2026

    सदन में सरकार को घेरते हुए प्रियंका गांधी ने पूछा- सरकार बताएं पैलेट गन चलाने का ऑर्डर किसने दिया

    July 28, 2026
    -advertisement-
    Top Posts

    पाली के देसूरी नाल हादसे में तीन स्कूली बच्चियों की मौत

    December 9, 202427 Views

    पूजा स्थल अधिनियम को दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी। इसे दोबारा क्यों देखें?

    December 5, 2024100 Views

    ‘1.5 करोड़ पेड़ काट दिए गए, ताकि एक बिजनेसमैन…’, ग्रेट निकोबार को लेकर मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

    June 5, 202617 Views
    -advertisement-
    Stay In Touch
    • Facebook
    • YouTube
    • Twitter
    • Instagram
    Recent News

    प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग दिखाती है कि भीड़ नियंत्रण की नीति अब भी ब्रिटिश दौर जैसी है

    July 30, 2026

    पैलेट गन: सुप्रीम कोर्ट ने ‘असाधारण स्थितियों’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि RAF के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

    July 30, 2026

    ‘निर्वाचित तानाशाही’ की अभेद्य दीवार में छेद, युवाओं ने दिखाया रास्ता

    July 30, 2026
    Most Popular

    पाली के देसूरी नाल हादसे में तीन स्कूली बच्चियों की मौत

    December 9, 202427 Views

    पूजा स्थल अधिनियम को दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी। इसे दोबारा क्यों देखें?

    December 5, 2024100 Views

    ‘1.5 करोड़ पेड़ काट दिए गए, ताकि एक बिजनेसमैन…’, ग्रेट निकोबार को लेकर मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

    June 5, 202617 Views
    Contact Us

    CHIEF EDITOR
    Hanuman Mandar

    ADDRESS
    Office No. 4 Opp. Jai Hind Bal Mandir School Jalori Gate Jodhpur 342001, Rajasthan

    CONTACT NO.
    0291-2640948

    EMAIL
    jodhpurherald@gmail.com

    WEB ADDRESS
    www.jodhpurherald.com

    © 2026 www.jodhpurherald.com. Designed by www.WizInfotech.com.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.