नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट-यूजी) 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी चार्जशीट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कई बड़ी कमियों का ज़िक्र किया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, एक ही विषय विशेषज्ञ को परीक्षा तैयार करने की कई प्रक्रियाओं में शामिल किया गया और उन्हें जरूरत से ज्यादा पहुंच (एक्सेस) मिली. इसके अलावा, एनटीए मुख्यालय में काम के दौरान उन पर नज़र रखने के लिए लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी नहीं थी. सीबीआई ने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज सिर्फ 20-25 दिन तक ही सुरक्षित रखी जाती थी, जिसकी वजह से जांच के लिए ज़रूरी फुटेज उपलब्ध नहीं मिल सकी.
सीबीआई ने यह भी खुलासा किया है कि एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने परीक्षा वाले दिन एक सीकर के शिक्षक द्वारा ईमेल से भेजी गई पेपर लीक की सूचना पर जवाब देने में पांच दिन लगा दिए. शिक्षक को उसके मकान मालिक ने एक गेस पेपर के बारे में बताया था, जिसके सवाल परीक्षा में आए असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे. यह परीक्षा देशभर के 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने दी थी. एनटीए प्रमुख ने इस ईमेल का जवाब 8 मई को दिया.
94 पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट, जिसकी प्रति दिप्रिंट के पास मौजूद है, में सीबीआई ने कहा है कि एनटीए के विषय विशेषज्ञों को परीक्षा तैयार करने की एक से ज्यादा प्रक्रियाओं में शामिल किया गया. इससे उन्हें पूरे प्रश्नपत्र तक पहुंच मिल गई और पेपर लीक होने की संभावना बढ़ गई.
सीबीआई ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की है. इनमें एनटीए पैनल के विषय विशेषज्ञ पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा संजय हवेलदार और मनीषा मंधारे भी शामिल हैं. कुलकर्णी केमिस्ट्री, हवेलदार फिजिक्स और मंधारे बॉटनी की विशेषज्ञ थीं.
चार्जशीट में सीबीआई ने नीट परीक्षा के प्रश्न तैयार करने की पूरी प्रक्रिया भी बताई है. एजेंसी के मुताबिक, पहले चरण में आइटम राइटिंग होती है. इस चरण में विषय विशेषज्ञ सवाल और उनके जवाब तैयार करते हैं. उन्हें यह नहीं बताया जाता कि उनके बनाए सवाल परीक्षा में इस्तेमाल होंगे या नहीं.
इसके बाद मॉडरेशन का चरण आता है. इसमें मॉडरेटर कहलाने वाले विशेषज्ञ एनटीए के लिए चार अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट तैयार करते हैं. हर सेट में 45 सवाल, यानी कुल 180 सवाल तैयार किए जाते हैं.
सीबीआई के अनुसार, मॉडरेशन का काम यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी सेटों का कठिनाई स्तर एक जैसा हो, जवाब सही हों और सभी सवाल तय सिलेबस के अंदर से हों.
इसके बाद वेटर्स (Vetters) कहलाने वाले विषय विशेषज्ञ इन प्रश्नपत्रों को हल करते हैं और उनके जवाबों का मिलान मॉडरेटर द्वारा दिए गए जवाबों से करते हैं. अगर दोनों के जवाब अलग होते हैं, तो नीट निदेशक मॉडरेटर और वेटर की बैठक कराकर विवाद सुलझाते हैं.
इसके बाद अंतिम प्रश्नपत्रों का अलग-अलग भारतीय भाषाओं में ट्रांसलेट किया जाता है. फिर बैक ट्रांसलेशन की प्रक्रिया होती है, जिसमें ट्रांसलेटेड सवालों को दोबारा अंग्रेज़ी में बदला जाता है, ताकि यह जांचा जा सके कि अनुवाद में सवाल का सही मतलब बना हुआ है या नहीं.
सीबीआई ने कहा कि आदर्श स्थिति में इन सभी चरणों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ होने चाहिए और किसी एक विशेषज्ञ को सभी अंतिम प्रश्नपत्र नहीं दिखने चाहिए, ताकि पेपर लीक की संभावना न रहे.
लेकिन एजेंसी का आरोप है कि नीट-यूजी 2026 में ऐसा नहीं हुआ.
चार्जशीट में कहा गया है, “असल प्रक्रिया में कई विशेषज्ञों को एक से ज्यादा चरणों में लगाया गया. मॉडरेशन के बाद संबंधित विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच मिल गई. खासकर अनुवाद और बैक ट्रांसलेशन के दौरान एक ही विशेषज्ञ चारों अंतिम मास्टर सेट देख सकता था.”
दिप्रिंट से बातचीत में एनटीए प्रमुख अभिषेक सिंह ने कहा, “मैं सीबीआई की जांच के निष्कर्षों पर टिप्पणी नहीं कर सकता. मामला अदालत में विचाराधीन है. दोबारा परीक्षा कराने को लेकर हमने जो कदम उठाए, उनका उल्लेख पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में किया गया है.”
सीबीआई ने एनटीए के बुनियादी ढांचे में भी कई कमियों का जिक्र किया है. एजेंसी के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज सिर्फ 20-25 दिन तक सुरक्षित रखी जाती थी और गोपनीय सेक्शन में विषय विशेषज्ञों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई लाइव सीसीटीवी कंट्रोल रूम नहीं था.
चार्जशीट में कहा गया है, “एनटीए की पहली मंजिल का पूरा एक हिस्सा गोपनीय सेक्शन के रूप में इस्तेमाल होता है. वहां सीसीटीवी का बैकअप केवल 20-25 दिन तक ही रखा जाता था. नीट-यूजी 2026 से जुड़ा गोपनीय काम 7 अप्रैल 2026 को पूरा हो गया था, जबकि यह मामला 12 मई 2026 को दर्ज हुआ. इसलिए जांच के समय उस अवधि की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं थी.”
सीबीआई ने आगे कहा, “एनटीए में सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग के लिए कोई अलग कंट्रोल रूम नहीं था. इसी वजह से गोपनीय हॉल में विषय विशेषज्ञों की गतिविधियों पर कोई नज़र नहीं रखी जा सकी.”

