प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (11 जनवरी, 2026) को ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व किया, यह एक औपचारिक जुलूस था जो गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपनी जान देने वालों को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया था।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के रूप में आयोजित इस यात्रा में 108 घोड़ों का जुलूस शामिल था, जो वीरता और बलिदान को दर्शाता था।
गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि 1 हजार साल पहले आतताई सोच रहे थे कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर में फहरा रही ध्वजा बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है।
दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई।
दरअसल 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने को लेकर जवाहरलाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी।
पीएम ने सद्भावना ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए आगे कहा कि हमें आज भी सावधान रहना है, एकजुट रहना है। ऐसी ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटनें की कोशिशों में लगी हुई हैं।
पीएम ने इससे पहले मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फिर फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया।
PM मोदी शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचे थे। यहां सोमनाथ मंदिर पर साल 1026 में हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है।

