यह बदलाव MP में बच्चों की मौत की घटना के बाद दिसंबर 2025 में जारी एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पर पब्लिक में हुई बातचीत के बाद आया है. हालांकि, यह इस बात को रेगुलेट नहीं करता कि सिरप कैसे बनाए जाते हैं.
नई दिल्ली: भारत में अब बिना डॉक्टर के पर्चे के कफ सिरप नहीं बेचे जाएंगे. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 जून को एक नोटिफिकेशन जारी करके ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव किया है. इसमें ‘कफ सिरप’ को शेड्यूल K से हटा दिया गया है. शेड्यूल K उन दवाओं की लिस्ट है जिन्हें बिना किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के पर्चे के बेचा जा सकता है.
यह बदलाव पिछले साल 29 दिसंबर को जारी एक ड्राफ्ट प्रपोज़ल पर जनता के सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद किया गया है. यह प्रपोज़ल पिछले साल के आखिर में मध्य प्रदेश में खराब कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत के बाद आया था. इस घटना में कच्चे माल की सोर्सिंग और क्वालिटी कंट्रोल में नाकामी सामने आई थी, जिसके बाद देश की सबसे बड़ी दवा रेगुलेटरी बॉडी ने कार्रवाई की.
इस बदलाव में शेड्यूल K के तहत लिस्टेड दवाओं की एक कैटेगरी से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया गया है, जिससे उनकी ओवर-द-काउंटर (OTC) उपलब्धता खत्म हो गई है. बेनाड्रिल, ग्लाइकोडिन, ज़ेडेक्स, टस्क DX, ग्रिलिंक्टस, कॉफ़सिल्स, हिमालय कोफ़लेट और डाबर हनीटस जैसे आम तौर पर बिकने वाले कफ सिरप को अब रिटेल फार्मेसी से खरीदने के लिए वैलिड प्रिस्क्रिप्शन की ज़रूरत होगी. हालांकि, गले की खराश को शांत करने और खांसी दबाने के लिए इस्तेमाल होने वाली लॉज़ेंज, OTC लिस्ट में बनी रहेंगी.

