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    अमेरिकी रिपोर्ट में दावा- ‘भारत के साथ सैन्य संघर्ष में पाकिस्तान को मिली बढ़त’, कांग्रेस ने किया सरकार से सवाल

    Jodhpur HeraldBy Jodhpur HeraldNovember 21, 2025

    अमेरिकी कांग्रेस में दाखिल की गई एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि इस साल मई में भारत के साथ संघर्ष में ‘पाकिस्तान का पलड़ा भारी था’ और चीन ने इस संघर्ष का फ़ायदा उठाते हुए अपने ‘हथियारों का परीक्षण और प्रचार’ किया.

    हालांकि चार दिनों तक चले इस संघर्ष में भारत ने दावा किया था कि उसने पाकिस्तान की सीमा में मौजूद कई ‘आतंकी ढांचों को नष्ट’ कर दिया और भारतीय सेना को इस सैन्य संघर्ष में ‘कामयाबी’ मिली.

    यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (यूएससीसी) की रिपोर्ट के 108वें और 109वें पेज में ये भी कहा गया है कि चीन ने फ़र्ज़ी सोशल मीडिया अकाउंट और एआई जेनरेटेड तस्वीरों के सहारे एक ‘दुष्प्रचार का अभियान’ चलाया ताकि फ़्रांसीसी रफ़ाल विमानों को ‘बदनाम’ किया जा सके और उसके अपने जे-35 लड़ाकू विमानों को ‘बढ़ावा’ मिले.

    रिपोर्ट में एक जगह ये कहा गया है कि ‘पाकिस्तानी सेना की चार दिन के संघर्ष के दौरान भारत पर हासिल की गई सफलता में चीन के हथियारों की भूमिका दिखी’.

    साथ ही रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में इसी साल 22 अप्रैल को हुए हमले को ‘विद्रोहियों का हमला’ भी बताया गया है.

    इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे भारत की कूटनीति के लिए गंभीर झटका बताया है. वहीं, बीजेपी ने परोक्ष रूप से विपक्ष पर ही निशाना साधा है.

    रिपोर्ट में क्या-क्या है?

    ऑपरेशन सिंदूर

    इमेज स्रोत,Getty Images

    745 पन्नों की रिपोर्ट में एक हिस्सा दक्षिण और मध्य एशिया में चीन के रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के बारे में है.

    यहीं पर भारत और चीन के बीच तनाव घटाने के लिए हुई उच्च-स्तरीय सैन्य बैठकों का भी ज़िक्र है.साथ ही एससीओ बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तियानजिन जाने को भी रेखांकित किया गया है.

    और इसी हिस्से में एक जगह यह भी दावा किया गया है कि चीन ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए पाकिस्तान के सैन्य संकट का इस्तेमाल अपनी रक्षा क्षमताओं को परखने और इसे प्रमोट करने के लिए किया.

    रिपोर्ट में कहा गया है, “7-10 मई 2025 के दौरान पाकिस्तान और भारत की सेनाओं के बीच हुए संघर्ष में चीन की भूमिका ने दुनिया का ध्यान खींचा. क्योंकि पाकिस्तान की सेना चीनी हथियारों पर निर्भर थी और कथित तौर पर उसने चीन की ख़ुफ़िया जानकारी का भी इस्तेमाल किया.”

    “इस संघर्ष की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के एक विवादित क्षेत्र में हुए घातक विद्रोही हमले के जवाब में भारत की कार्रवाई से हुई थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. दोनों देशों ने 50 सालों में पहली बार एक-दूसरे की सीमाओं के इतना भीतर जाकर हमले किए. भारतीय सेना का दावा था कि चीन ने इस पूरे संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को भारतीय सैन्य ठिकानों के बारे में लाइव इनपुट दिए और इस संघर्ष का इस्तेमाल अपनी सैन्य क्षमताओं के परीक्षण के मैदान के तौर पर किया. पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया, जबकि चीन ने न तो अपनी भूमिका की पुष्टि की और न ही खंडन.”

    पाकिस्तान-चीन का सहयोग और भारत

    पाकिस्तान के साथ सीमा पर गश्त करते सैनिक

    इमेज स्रोत,Getty Images

    इमेज कैप्शन,रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का सबसे बड़ा डिफ़ेंस सप्लायर होने के नाते साल 2019 से 2023 के बीच पाकिस्तान के 82 फ़ीसदी हथियार चीन से आए थे

    यूएस कमीशन की ये रिपोर्ट कहती है कि चीन ने पाकिस्तान के साथ साल 2025 में अपना सैन्य सहयोग बढ़ाया, जिससे भारत के साथ सुरक्षा के मुद्दे पर उसका तनाव गहरा गया.

    इस रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तानी सेना को भारत के ख़िलाफ़ चार दिनों के संघर्ष में मिली सफलता ने चीनी हथियारों का प्रदर्शन किया. हालांकि, इस संघर्ष को ‘प्रॉक्सी वॉर’ कहना चीन की उकसाने वाली भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना होगा. लेकिन चीन ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए इस संघर्ष का इस्तेमाल अपने हथियारों की क्षमताओं को परखने, उनका प्रचार करने के लिए किया. ये भारत के साथ चल रहे उसके सीमा तनाव और डिफ़ेंस इंडस्ट्री से जुड़ी उसकी बढ़ती महत्वकांक्षाओं, दोनों ही लिहाज से उपयोगी था.”

    रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का सबसे बड़ा डिफ़ेंस सप्लायर होने के नाते साल 2019 से 2023 के बीच पाकिस्तान के 82 फ़ीसदी हथियार चीन से आए थे. मई की झड़प पहला मौका था जब एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम, पीएल-15 एयर-टू-एयर मिसाइलें और जे-10 लड़ाकू विमान जैसे एडवांस वेपन सिस्टम किसी जंग में इस्तेमाल हुए. संघर्ष में चीन को असल परिस्थितियों में परीक्षण का मौका मिला.

    चीन ने कथित तौर पर पाकिस्तान को जून महीने में 40 जे-35 फ़िफ़्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान, केजे-500 विमान और बैलिस्टिक मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम बेचने की पेशकश की. उसी महीने पाकिस्तान ने साल 2025-26 के रक्षा बजट में 20 फ़ीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की थी.

    रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र है कि संघर्ष के बाद अलग-अलग देशों में चीन के दूतावासों ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अपने हथियारों की सफलता की प्रशंसा की. रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तान की ओर से भारत में इस्तेमाल होने वाले फ़्रांसीसी रफ़ाल लड़ाकू विमानों को गिराने में चीनी हथियारों के इस्तेमाल को ख़ासतौर पर एक बड़ा सेलिंग प्वॉइंट बनाकर पेश किया गया.”

    इस संघर्ष में पाकिस्तान ने भारत के छह रफ़ाल विमान गिराने का दावा किया था. हालांकि भारत ने पाकिस्तान के इस दावे की कभी पुष्टि नहीं की और इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि संघर्ष में उसके कितने विमानों को नुकसान पहुंचा था और ये कौन से विमान थे.

    रिपोर्ट में फ़्रांसीसी ख़ुफ़िया एजेंसियों के हवाले से बताया गया है कि चीन ने अपने जे-35 विमान को आगे बढ़ाने और फ़्रांसीसी रफ़ाल की बिक्री को नुक़सान पहुंचाने के लिए एक दुष्प्रचार अभियान शुरू किया. इस अभियान में फ़र्ज़ी सोशल मीडिया अकाउंट और एआई-वीडियो गेम से निकाली गई तस्वीरों को ऐसे भारतीय विमानों का मलबा बताकर फैलाया गया, जिन्हें चीनी हथियारों ने मार गिराया हो.

    रिपोर्ट ये भी कहती है कि चीनी दूतावास के अधिकारियों ने इंडोनेशिया को भी रफ़ाल विमान खरीदने की प्रक्रिया रोकने के लिए मना लिया, जिससे चीन को क्षेत्र के अन्य देशों में अपने रक्षा साजोसामान की बिक्री करने का मौका मिला.

    भारत में प्रतिक्रिया

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को लेकर पीएम मोदी और केंद्र की एनडीए सरकार को निशाने पर लिया है.

    उन्होंने रिपोर्ट के कुछ दावों का ज़िक्र करते हुए लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप अब तक 60 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को रोक दिया था. प्रधानमंत्री इस बारे में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं.”

    “अब अमेरिकी कांग्रेस के यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी कमीशन की यह रिपोर्ट आई है, जो भारत के लिए एकदम अस्वीकार्य है. क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस पर आपत्ति और विरोध दर्ज कराएंगे? हमारी कूटनीति को एक और गंभीर झटका लगा है.”

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने जयराम रमेश के बयान पर एक खबर को कोट करते हुए लिखा, “ये बेहद चौंकानेवाला है. एक आधिकारिक अमेरिकी रिपोर्ट कैसे अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले को ‘विद्रोही हमला’ कह रही है और चार दिन के ऑपरेशन सिंदूर में भारत पर पाकिस्तान की सैन्य सफलता की बात कह रही है? आख़िर मोदी सरकार भारत के पक्ष में सबूत देने और कूटनीति में नाकाम क्यों रही? मोदी सरकार को संसद में इसका जवाब देना चाहिए.”

    भारत ने पाकिस्तान पर अपनी सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया था.

    हालांकि, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने रिपोर्ट के एक हिस्से का ज़िक्र करते हुए विपक्ष पर परोक्ष हमला किया है.

    उन्होंने लिखा, “असल सवाल ये है कि चीन के नैरेटिव को कौन लोग बढ़-चढ़कर आगे कर रहे थे. कौन लगातार कितने विमान गिरे जैसे आंकड़े मांगते रहे, जबकि भारतीय वायुसेना साफ़ कह चुकी थी कि उसकी सभी संपत्तियां सुरक्षित हैं और संघर्ष के दौरान ऑपरेशनल जानकारी साझा करना देश की सुरक्षा को खतरे में डाल देगा. चीनी दुष्प्रचार की मशीन के ऑपरेटर बाहरी थे. लेकिन भारत के भीतर जो भोंपू था? हम सब जानते हैं कि उसे कौन चला रहा था.”

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