प्रधानमंत्री ने कहा, ‘कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता कि आज से 20 या 30 साल बाद दुनिया कैसी दिखेगी. लेकिन बदलाव के हर दौर में चुनौतियां और अवसर, दोनों ही आते हैं.’
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली से ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को जिंदगी से जुड़े कुछ सबक दिए. उन्होंने छात्रों से कहा कि संस्थान से बाहर निकलने के बाद वे जो भी फैसला लें, उससे पहले यह भी सोचें कि उससे देश को क्या फायदा होगा और वह देश की किस जरूरत को पूरा करेगा.
मोदी ने कहा, “अगले 30-35 सालों में आप जो कुछ करेंगे, उससे विकसित भारत की दिशा में भारत का सफर तय होगा…आपकी डिग्री सिर्फ इस बात का सबूत नहीं है कि आपने परीक्षाएं पास कीं, अच्छा CGPA हासिल किया या प्लेसमेंट पाया. यह इस बात का सबूत है कि आप मुश्किल समस्याओं को हल करने और बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं.”
उन्होंने संस्थान के 57वें दीक्षांत समारोह में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को संबोधित किया. वह पहली बार IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में खुद मौजूद रहे.
COVID-19 महामारी के कारण उन्होंने नवंबर 2020 में IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में ऑनलाइन हिस्सा लिया था.
प्रधानमंत्री का IIT दिल्ली जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजधानी के जंतर-मंतर पर करीब दो हफ्ते पहले हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ है. इस प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था.
मोदी ने कहा कि IIT के कई पूर्व छात्रों की सफलता सिर्फ इसलिए नहीं हुई कि उन्होंने सही जवाब खोज लिए थे, बल्कि इसलिए भी हुई क्योंकि उन्होंने ऐसे सवालों को पहचाना, जिन्हें दुनिया ने पूछना बंद कर दिया था.
प्रधानमंत्री ने कहा, “सिर्फ सवाल मत पूछिए. जवाब खोजने का साहस रखिए.”
मोदी ने छात्रों को यह भी चेतावनी दी कि वे ऐसे समय में ग्रेजुएट हो रहे हैं, जब दुनिया तेजी से बदल रही है और रणनीतिक समीकरण, दुनिया में ताकत का संतुलन, तकनीक, उद्योग और पेशे, सभी पहले से कहीं ज्यादा तेजी से बदल रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा, “कोई भी यह नहीं बता सकता कि आज से 20 या 30 साल बाद दुनिया कैसी होगी. लेकिन बदलाव का हर दौर चुनौतियां और मौके दोनों लेकर आता है. याद रखिए, जो लोग सीखते रहेंगे, वे सफल होंगे, और जो लोग नए समाधान खोजेंगे, वे चुनौतियों को मौकों में बदल देंगे.” उन्होंने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से अपनी जिज्ञासा और सीखने की आदत को बनाए रखने को कहा.
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में बनाई गई परम प्रज्ञा AI से चलने वाली हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का भी उद्घाटन किया.
रिसर्च के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार रिसर्च और इनोवेशन के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग की व्यवस्था कर रही है.
उन्होंने IIT में होने वाली परीक्षाओं और कैंपस के बाहर ग्रेजुएट छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों के बीच तुलना की. उन्होंने कहा, “IIT की परीक्षा में एक सिलेबस होता है. लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ सिलेबस से बाहर होता है.”
मोदी ने कहा कि IIT में छात्रों को पता होता है कि उन्हें क्या पढ़ना है, कौन से असाइनमेंट पूरे करने हैं और कौन सी परीक्षाएं देनी हैं, लेकिन जिंदगी हमेशा उन्हें यह नहीं बताएगी कि “असली सवाल” क्या है.
उन्होंने कहा, “आपको उस सवाल को खुद पहचानना होगा.”
थोड़े हल्के अंदाज में उन्होंने कहा कि भले ही सभी छात्र समारोह में मौजूद हैं, लेकिन उनके मन में कुछ और जरूर चल रहा होगा. उन्होंने कहा, “मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन आपके मन में कुछ न कुछ जरूर चल रहा होगा. हर छात्र के मन में भविष्य की अपनी एक तस्वीर जरूर होगी…”
उन्होंने कहा, “आपके दिमाग के किसी कोने में कुछ और चल रहा होगा. मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन हर छात्र के मन में विचार जरूर चल रहे होंगे. आप में से हर किसी के मन में शायद भविष्य की एक तस्वीर होगी…”
प्रधानमंत्री ने दीक्षांत समारोह में अच्छे प्रदर्शन करने वाले छात्रों को IIT दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान दिए. इनमें प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल शामिल थे.

