इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम के मामले में, 57वीं GST काउंसिल ने अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फ़ैसला किया। यह कमेटी देखेगी कि उस असली खरीदार को कैसे बचाया जाए जिसके पास सही इनवॉइस है, जिसे सामान मिल गया है और जिसने अपने सप्लायर को पूरा पेमेंट कर दिया है।
गुरुवार (8 अक्टूबर, 2026) को GST काउंसिल ने GST अधिकारियों की गिरफ़्तारी की शक्तियों को खत्म करने और मुक़दमा चलाने की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने को मंज़ूरी दी।
वित्त मंत्रालय ने कहा, “रेट का स्ट्रक्चर तय हो चुका है, इसलिए काउंसिल अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि टैक्स रोज़ाना कैसे काम करता है।” मंत्रालय ने यह भी कहा कि GST रेट में बदलाव अब साल में एक बार होगा।
इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम के मामले में, 57वीं GST काउंसिल ने अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फ़ैसला किया। यह कमेटी देखेगी कि उस असली खरीदार को कैसे बचाया जाए जिसके पास सही इनवॉइस है, जिसे सामान मिल गया है और जिसने अपने सप्लायर को पूरा पेमेंट कर दिया है।
मंत्रालय ने कहा, “अधिकारियों की कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी स्टडी पूरी कर लेगी और अगली काउंसिल मीटिंग में एक एजेंडा पेश किया जाएगा।”
GST काउंसिल ने GST अधिकारियों की गिरफ़्तारी की शक्तियों को खत्म कर दिया।
मुक़दमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। कम से कम सज़ा का नियम हटा दिया गया है, और काउंसिल के फ़ैसले के अनुसार, हर मामले में सज़ा – चाहे जुर्माना हो, जेल हो या दोनों – अदालत के विवेक पर छोड़ दी गई है।
मंत्रालय ने कहा कि सामान्य जुर्माना, जो तब लागू होता है जब कोई खास जुर्माना तय नहीं होता, ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दिया गया है।

