जॉन ब्रिटास के ख़िलाफ़ कथित ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी को लेकर राज्यसभा में हंगामा. CPI(M) सांसद ने कहा, ‘यह दूसरों को अलग-थलग दिखाने का एक तरीका है…’ चेयरमैन ने कहा, ‘हमारी संस्कृति अनोखी है… सांसदों को सलाह है कि वे किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं.’
नई दिल्ली: बुधवार सुबह राज्यसभा में हंगामा हो गया. CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने BJP सांसद सुष्मिता देव पर उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया.
BJP सांसद की कथित टिप्पणी के बाद CPM ने पलटवार करते हुए इसे दक्षिण भारतीयों का अपमान बताया. ब्रिटास ने सदन के अंदर देव का नाम नहीं लिया, लेकिन मीडिया से बात करते हुए उनका जिक्र किया.
केरल से राज्यसभा सांसद ब्रिटास ने कहा कि उन्होंने सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव दिया है.
कथित घटना 11 अगस्त को राज्यसभा में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान हुई.
मामला राज्यसभा में उठाया गया और सभापति ने कहा कि किसी का अपमान नहीं होना चाहिए. सुष्मिता देव की ब्रिटास के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई.
“सर, मैं यह मुद्दा भारी मन से उठा रहा हूं क्योंकि यह इस सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान का सवाल है. यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि सभी पार्टियों का मुद्दा है. मैं शुरुआत में ही कहना चाहता हूं कि मैं एक गर्वित भारतीय, दक्षिण भारतीय और निश्चित रूप से एक गर्वित मलयाली हूं, सर. मलयाली होना, हमारी भाषा, संस्कृति, खाना और निश्चित रूप से हमारा संविधान, जो हमारी विविधता का सम्मान करता है, मेरे लिए बहुत मायने रखता है,” ब्रिटास ने राज्यसभा में कहा.
ब्रिटास ने मीडिया से कहा कि उन्होंने सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया है. “दूसरे दिन जब मैं सदन में बोल रहा था, तब उन्होंने मेरे खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की और मुझे लुंगीवाला कहा. मैंने धोती पहनी हुई थी और मुझे मलयाली होने पर गर्व है, दक्षिण भारतीय होने पर गर्व है. ये सब हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं. लेकिन इस तरह की पहचान को अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल करना स्वीकार नहीं किया जा सकता,” उन्होंने मीडिया से कहा.
“और मुझे लगता है कि सदन को इस पर फैसला लेना चाहिए. हमने उनके खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया है. बेशक, मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं है,” उन्होंने कहा.
हालांकि, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि उन्होंने वह बात नहीं सुनी थी, जिसका ब्रिटास जिक्र कर रहे थे.
“सर, इस सम्मानित सदन में हर सम्मानित सदस्य बराबर है, हम सभी बराबर भारतीय हैं. हां सर, अगर कोई ऐसी बात है जो आपत्तिजनक है या देश के चरित्र या सदन की गरिमा के खिलाफ है, तो मैं सम्मानित सभापति से अनुरोध करना चाहूंगा कि सदस्य को अपने कक्ष में बुलाकर सुनें कि क्या हुआ था. क्योंकि मैं सम्मानित सदस्य की कही हुई बात का गवाह नहीं हूं,” रिजिजू ने कहा.
सुष्मिता देव की टिप्पणी का जिक्र करते हुए ब्रिटास ने मीडिया से कहा, “यह दूसरे लोगों को अलग मानने वाली सोच का छोटा रूप है. उन्होंने जो टिप्पणी की, वह एक सांसद के लिए उचित नहीं है. मेरा मानना है कि माननीय सभापति और विशेषाधिकार समिति इस पर ध्यान देंगे.”
सभापति ने अपने फैसले में कहा कि सभी सदस्यों को ध्यान रखना चाहिए कि वे साथी सदस्यों की भावनाओं और संवेदनाओं को ठेस न पहुंचाएं.
“माननीय सदस्यों, मेरे संज्ञान में कुछ ऐसी घटनाएं आई हैं जिनमें सदस्य सदन में दूसरे सदस्यों के भाषण के बीच हस्तक्षेप करते हुए असम्मानजनक और अशोभनीय टिप्पणियां कर रहे हैं. हमारी संस्कृति अनोखी है. मैं माननीय सदस्यों को सलाह दूंगा कि वे ध्यान रखें कि उनके साथी सदस्यों की भावनाओं और संवेदनाओं को ठेस न पहुंचे,” सभापति ने कहा.
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद क्रिस्टोफर तिलक ने ब्रिटास का समर्थन किया और कहा, “यह BJP की ओर से दक्षिण भारतीय संस्कृति का अपमान था. यह सिर्फ कपड़ों की बात नहीं है. कल राज्यसभा के वरिष्ठ सांसदों में से एक जॉन ब्रिटास अपना सवाल रख रहे थे, तभी पश्चिम बंगाल की एक सदस्य ने उन्हें अपमानजनक तरीके से ‘लुंगीवाला, लुंगीवाला’ कहा. इतनी विविधता वाले देश में यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे साफ दिखता है कि BJP का गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के प्रति क्या रवैया है.”

